Delhi: राजधानी की असोला भाटी वाइल्डलाइफ सेंचुरी में स्थित नीली झील अब दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान बनाने जा रही है। दिल्ली सरकार इसे देश की पहली रामसर साइट घोषित कराने की प्रक्रिया में जुट गई है। सर्वे में यहां 250 से ज
Delhi: राजधानी की असोला भाटी वाइल्डलाइफ सेंचुरी में स्थित नीली झील अब दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान बनाने जा रही है। दिल्ली सरकार इसे देश की पहली रामसर साइट घोषित कराने की प्रक्रिया में जुट गई है। सर्वे में यहां 250 से ज्यादा प्रजातियों और कई दुर्लभ पक्षियों के मिलने से इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि बनाने की उम्मीद बढ़ गई है।
नीली झील को रामसर साइट बनाने की क्या है प्रक्रिया
दिल्ली सरकार ने 2 फरवरी 2026 को विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर इस योजना की घोषणा की थी। इसके बाद 3 फरवरी को केंद्र सरकार के साथ चर्चा शुरू हुई और 16 अप्रैल 2026 तक इस प्रक्रिया में काफी तेजी आई है। चूंकि इस झील का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा में आता है, इसलिए दिल्ली सरकार हरियाणा सरकार से भी बातचीत कर रही है। इसके बाद एक विस्तृत प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) को भेजा जाएगा, जिसे संयुक्त राष्ट्र (UN) की मंजूरी के बाद रामसर साइट का दर्जा मिलेगा।
झील में कौन-कौन से दुर्लभ पक्षी और जीव पाए गए
वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया ने फरवरी 2026 में यहां एक सर्वे किया था। इस सर्वे में पाया गया कि पुराने खनन गड्ढों से बनी यह झील अब पक्षियों का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है। यहां कई ऐसी प्रजातियां मिली हैं जो अब बहुत कम बची हैं।
| श्रेणी |
पक्षियों/जीवों के नाम |
| संवेदनशील प्रजातियां |
कॉमन पोचार्ड और रिवर टर्न |
| लुप्तप्राय प्रजातियां |
इजिप्शियन वल्चर (मिश्र के गिद्ध) और स्टेपी ईगल |
| अत्यंत लुप्तप्राय |
व्हाइट-रम्प्ड वल्चर और रेड-हेडेड वल्चर |
रामसर साइट घोषित होने के लिए क्या नियम हैं
रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के रामसर शहर में साइन हुआ था, जिसका मकसद दुनिया भर की आर्द्रभूमियों को बचाना है। भारत 1982 में इसका हिस्सा बना था। किसी भी जगह को रामसर साइट तब माना जाता है जब वहां सालाना कम से कम 20,000 पक्षी आते हों या किसी एक प्रजाति की कुल आबादी का एक प्रतिशत वहां मौजूद हो। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे दिल्ली के लिए गर्व का विषय बताया है।