Delhi: नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने इस साल मानसून के दौरान शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की है। NDMC के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने शुक्रवार को मानसून एक्शन प्लान-2026 पेश किया।
Delhi: नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने इस साल मानसून के दौरान शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की है। NDMC के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने शुक्रवार को मानसून एक्शन प्लान-2026 पेश किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बारिश के दिनों में दिल्ली को जलभराव मुक्त रखना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देना है। प्रशासन ने साफ किया है कि इस बार तकनीक के जरिए पानी निकासी की व्यवस्था को सुधारा जाएगा ताकि लोगों को आने-जाने में कोई परेशानी न हो।
जलभराव रोकने के लिए क्या है हाई-टेक तैयारी?
NDMC ने इस साल पहली बार भूमिगत नालों की स्थिति जानने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। ताज मानसिंह के पास क्यू पॉइंट पर इस रोबोटिक सिस्टम से नालों की स्कैनिंग की गई है और अब तक लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में CCTV कैमरे और सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली लगाई गई है। इससे कंट्रोल रूम को तुरंत पता चल जाएगा कि किस इलाके में पानी जमा हो रहा है और वहां तुरंत राहत टीम भेजी जा सकेगी।
किन इलाकों पर रहेगी प्रशासन की खास नजर?
प्रशासन ने दिल्ली के 5 मुख्य हॉटस्पॉट की पहचान की है जहां भारी बारिश में अक्सर पानी भरता है। इन इलाकों की लिस्ट नीचे दी गई है:
- पुराना किला और आसपास का क्षेत्र
- दयाल सिंह कॉलेज रोड
- पंचकुइयां रोड
- हनुमान मंदिर क्षेत्र
- सत्य सदन इलाका
इन जगहों पर पहले से ही हाई-कैपेसिटी पंप सेट लगा दिए गए हैं। सरोजिनी नगर जैसे इलाकों में भी जलभराव रोकने के लिए पक्के इंतजाम किए गए हैं। नालों से गाद निकालने का दूसरा चरण 15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि पहला चरण मार्च के अंत तक पूरा किया जा चुका है। अगले साल इस रोबोटिक ऑपरेशन को और बढ़ाकर 3,200 मीटर तक करने की योजना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली में जलभराव रोकने के लिए कौन सी नई तकनीक अपनाई जा रही है?
NDMC ने पहली बार अंडरग्राउंड ड्रेनेज नेटवर्क की स्कैनिंग के लिए रोबोटिक तकनीक और संवेदनशील इलाकों में सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल शुरू किया है।
मानसून से पहले नालों की सफाई का काम कब तक पूरा होगा?
नालों से गाद निकालने (desilting) के दूसरे चरण का काम 15 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पहला चरण पहले ही पूरा हो चुका है।