Delhi-NCR: दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। ट्रक ऑपरेटरों ने 22 मई से 24 मई 2026 तक तीन दिनों के लिए चक्का जाम का ऐलान किया है। इस हड़ताल की वजह से शहर में जरूरी सामान की
Delhi-NCR: दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। ट्रक ऑपरेटरों ने 22 मई से 24 मई 2026 तक तीन दिनों के लिए चक्का जाम का ऐलान किया है। इस हड़ताल की वजह से शहर में जरूरी सामान की सप्लाई रुक सकती है, जिससे फल, सब्जी, दूध और दवाओं की कमी होने और कीमतों के बढ़ने का डर है।
ट्रक ऑपरेटरों की मुख्य मांगें क्या हैं?
ट्रक यूनियन मुख्य रूप से पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में की गई भारी बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं। हल्के वाहनों के लिए यह शुल्क 1400 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये और भारी ट्रकों के लिए 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया गया है। ऑपरेटरों का कहना है कि यह शुल्क केवल ट्रांजिट ट्रकों पर होना चाहिए, न कि उन वाहनों पर जो शहर के लिए जरूरी सामान लाते हैं। साथ ही, वे BS-6 वाहनों पर भी यह शुल्क लगाने का विरोध कर रहे हैं।
BS-4 वाहनों पर प्रतिबंध और अन्य विवाद
एक बड़ा विवाद 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में BS-4 वाहनों के प्रवेश पर लगने वाले पूर्ण प्रतिबंध को लेकर है। ट्रक यूनियनों का तर्क है कि 2020 तक रजिस्टर्ड इन वाहनों को इतने कम समय में बैन करना गलत है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने साफ किया है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो यह हड़ताल और लंबी खिंच सकती है। इस फैसले में संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर और ट्रांसपोर्ट वेलफेयर सोसाइटी जैसे कई संगठन शामिल हैं।
आम जनता पर इसका क्या असर पड़ेगा?
चक्का जाम के कारण दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर और मुख्य रास्तों पर ट्रकों की लंबी कतारें लग सकती हैं। चूंकि शहर की ज्यादातर जरूरी चीजें ट्रकों के जरिए ही आती हैं, इसलिए मंडियों में सामान की कमी हो सकती है। इससे आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ सकता है और जरूरी दवाओं की सप्लाई में भी देरी हो सकती है। फिलहाल सरकार और यूनियनों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
चक्का जाम कब से कब तक रहेगा?
ट्रक ऑपरेटरों ने 22 मई से 24 मई 2026 तक चक्का जाम का ऐलान किया है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में इसकी तारीख 21 से 23 मई भी बताई गई है।
ECC शुल्क में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
हल्के वाणिज्यिक वाहनों का शुल्क 1400 से बढ़ाकर 2000 रुपये और भारी ट्रकों का शुल्क 2600 से बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया गया है, जो लगभग 40-55% की वृद्धि है।