Finance: दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ऑफिस स्पेस की लीजिंग में भारी गिरावट आई है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच नेट लीजिंग 51% घटकर 3.28 मिलियन स्क्वायर फीट रह गई। इसका मुख्य कारण नए ऑफिस प्रोजेक्ट्स का समय पर
Finance: दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ऑफिस स्पेस की लीजिंग में भारी गिरावट आई है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच नेट लीजिंग 51% घटकर 3.28 मिलियन स्क्वायर फीट रह गई। इसका मुख्य कारण नए ऑफिस प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा न होना और सप्लाई की कमी बताया जा रहा है।
लीजिंग में गिरावट के मुख्य आंकड़े क्या हैं?
Cushman & Wakefield के डेटा के मुताबिक, पिछले साल की इसी अवधि में लीजिंग 6.74 मिलियन स्क्वायर फीट थी, जो अब घटकर 3.28 मिलियन स्क्वायर फीट रह गई है। दिल्ली-एनसीआर में स्थिति और भी खराब रही, जहाँ लीजिंग 61% तक गिर गई।
| क्षेत्र |
पिछला साल (msf) |
वर्तमान (msf) |
गिरावट (%) |
| Delhi-NCR और Mumbai |
6.74 |
3.28 |
51% |
| Delhi-NCR (अकेले) |
3.87 |
1.51 |
61% |
ऑफिस रेंट और सप्लाई पर क्या असर पड़ा?
भले ही लीजिंग कम हुई है, लेकिन ऑफिस का किराया बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में रेंट में 2 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि साल-दर-साल यह 6 से 9 प्रतिशत बढ़ा है। गुरुग्राम के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में तो किराया 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी क्वालिटी के ऑफिस की मांग ज्यादा है, जिससे आने वाले समय में किराया और बढ़ सकता है।
मार्केट में गिरावट की असली वजह क्या है?
Vestian और Cushman & Wakefield के मुताबिक, प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की रफ्तार धीमी रही है, जिससे नए ऑफिस स्पेस की सप्लाई कम हो गई है। बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई में डेवलपर्स अब काफी सावधानी बरत रहे हैं। हालांकि, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अभी भी ऑफिस स्पेस की मांग को बनाए हुए हैं, जिससे बाजार में पूरी तरह मंदी नहीं आई है।