Delhi और Mumbai में घर खरीदना हुआ मुश्किल, सैलरी का बड़ा हिस्सा खा रही EMI; एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी
Finance: दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में मिडिल क्लास के लिए अपना घर लेने का सपना अब मुश्किल होता जा रहा है। घर की मासिक किस्त यानी EMI लोगों की सैलरी को दीमक की तरह चाट रही है, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ गया है। ताजा
Finance: दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में मिडिल क्लास के लिए अपना घर लेने का सपना अब मुश्किल होता जा रहा है। घर की मासिक किस्त यानी EMI लोगों की सैलरी को दीमक की तरह चाट रही है, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों शहरों में घर खरीदना अब खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है।
Knight Frank India ने जुलाई 2026 में अपनी ‘हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स H1 2026’ रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 8 बड़े रियल एस्टेट बाजारों में से मुंबई एकमात्र ऐसा शहर है जो सामर्थ्य सूचकांक की तय सीमा से बाहर है। ब्याज दरों में कमी के बाद भी दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में घर खरीदना आम खरीदारों की पहुंच से दूर है, जबकि अन्य 6 शहरों में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है।
दिल्ली-एनसीआर में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ने का मुख्य कारण जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे, आरआरटीएस और नई मेट्रो जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में एक अच्छे मिड-सेगमेंट घर के लिए परिवार की सालाना कमाई कम से कम 20 से 25 लाख रुपये होनी चाहिए।
| विवरण | मुख्य आंकड़े/जानकारी |
|---|---|
| मुंबई में EMI का बोझ | आय का 51% हिस्सा EMI में जाता है |
| आदर्श EMI सीमा | मासिक आय का अधिकतम 30% (वैश्विक सलाह) |
| दिल्ली-एनसीआर जरूरी आय | सालाना 20-25 लाख रुपये (मिड-सेगमेंट घर के लिए) |
| मुंबई प्रॉपर्टी ट्रेंड | 2013-2023 के बीच कीमतों में 1% की गिरावट |
| देशभर में औसत वृद्धि | सालाना 3% की वास्तविक बढ़ोतरी |
| किराया रिटर्न | लगभग 2% |
फाइनेंस एक्सपर्ट सुजय यू और वेल्थ एडवाइजर अभिषेक के. ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। सुजय यू के मुताबिक, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में घर खरीदना अब अमीरी का रास्ता नहीं रहा, बल्कि यह एक EMI जाल बन गया है। वहीं अभिषेक के. का कहना है कि मुंबई का मध्यम वर्ग घर नहीं, बल्कि जिंदगी भर की EMI खरीद रहा है।
इसके अलावा मुंबई में जल संकट और धारावी पुनर्विकास जैसे मुद्दों से निर्माण कार्यों पर असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि अगर जल संकट जारी रहा, तो निर्माण लागत बढ़ेगी और इसका सीधा बोझ घर खरीदने वालों की जेब पर पड़ेगा।