Delhi और Mumbai में स्टूडेंट प्रोटेस्ट: पुलिस की कार्रवाई और नियमों पर छिड़ी बहस
Delhi: राजधानी दिल्ली और महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर पुलिस के अलग-अलग तरीकों की चर्चा हो रही है। दिल्ली में नीट यूजी पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छा
Delhi: राजधानी दिल्ली और महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर पुलिस के अलग-अलग तरीकों की चर्चा हो रही है। दिल्ली में नीट यूजी पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की सख्त कार्रवाई हुई, जबकि मुंबई पुलिस ने भीड़ रोकने के लिए अलग रणनीति अपनाई। इन दोनों शहरों में पुलिस के तौर-तरीकों को लेकर अब कानूनी बहस छिड़ गई है।
20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों और छात्रों ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने Pellet Guns का इस्तेमाल किया, जिससे तीन लोग घायल हुए। दिल्ली पुलिस के अपने नियमों (Standing Order No. 72 और L&O/10/2022) में Pellet Guns को भीड़ नियंत्रण के लिए मंजूरी नहीं मिली है। नियमों के मुताबिक पुलिस को कम से कम बल का प्रयोग करना चाहिए और फायरिंग की स्थिति में निशाना कमर के नीचे रखना चाहिए।
दूसरी तरफ, मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक शहर में धारा 37 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के जमा होने और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। मुंबई पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए WhatsApp पर नोटिस भेजे और उनके घरों पर जाकर उन्हें प्रदर्शन में शामिल न होने की सलाह दी।
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने का ऐलान किया है, हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच की प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। कोर्ट अब देशभर में पुलिस के व्यवहार के लिए एक समान गाइडलाइन (SOP) बनाने पर विचार कर रहा है। दिल्ली में Pellet Guns के इस्तेमाल के मामले में 28 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई हुई थी।