Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने नई तैयारी शुरू कर दी है। अब शहर की सड़कों पर पुराने तरीके के बजाय आधुनिक Precast तकनीक वाली नालियां लगाई जाएंग
Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने नई तैयारी शुरू कर दी है। अब शहर की सड़कों पर पुराने तरीके के बजाय आधुनिक Precast तकनीक वाली नालियां लगाई जाएंगी। इससे न केवल पानी की निकासी बेहतर होगी, बल्कि सड़कों पर होने वाला प्रदूषण और निर्माण कार्य के कारण लगने वाला जाम भी कम होगा।
Precast ड्रेन क्या हैं और इनसे क्या फायदा होगा?
PWD ने अब सभी ड्रेन रिमॉडलिंग के लिए Precast ड्रेन का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। PWD मंत्री Parvesh Sahib Singh ने बताया कि ये नालियां फैक्ट्री में बनकर आती हैं, जिन्हें बस मौके पर फिट करना होता है। पुराने ‘कास्ट इन-सिटु’ तरीके में नालियां बनाने में समय ज्यादा लगता था और उनकी उम्र सिर्फ 3-4 साल होती थी, जबकि Precast ड्रेन की गारंटी 50 साल है। इससे सड़कों पर खुदाई कम होगी और लोगों को आने-जाने में आसानी होगी।
ड्रेनेज मास्टर प्लान 2025 और बजट की जानकारी
दिल्ली सरकार ने जलभराव को कम करने के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत आने वाले समय में बड़े पैमाने पर काम किया जाएगा।
| विवरण |
जानकारी |
| कुल अनुमानित लागत |
₹57,362 करोड़ |
| North और North-West दिल्ली प्रोजेक्ट |
₹177 करोड़ से अधिक |
| अगले साल रिमॉडल होने वाली नालियां |
300 किलोमीटर |
| जलभराव कम करने का लक्ष्य |
अगले 3 साल में 50% तक |
| हादसों में कमी का लक्ष्य |
अगले 5 साल में 30% तक |
नालियों की सफाई और डेडलाइन की क्या स्थिति है?
मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने शहर की सभी नालियों की सफाई (Desilting) के लिए 30 जून की समय सीमा तय की है। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, 77 मुख्य नालियों में से 50% से ज्यादा सफाई का काम पूरा हो चुका है। अब तक 14 लाख मीट्रिक टन गाद निकाली जा चुकी है, जबकि कुल लक्ष्य 28 लाख मीट्रिक टन का है। खास बात यह है कि लगभग 40 साल बाद Delhi Gate ड्रेन की गहरी सफाई की जा रही है, जिसका 70% काम पूरा हो गया है।