Delhi: दिल्ली की कॉलोनियों और हाउसिंग सोसाइटी में घर-घर जाकर कूड़ा उठाने वाले निजी कर्मियों के लिए MCD एक नई पहल शुरू कर रहा है। अब इन कूड़ा उठाने वालों को आधिकारिक पहचान पत्र (ID Card) दिए जाएंगे। इस कदम से न केवल शहर क
Delhi: दिल्ली की कॉलोनियों और हाउसिंग सोसाइटी में घर-घर जाकर कूड़ा उठाने वाले निजी कर्मियों के लिए MCD एक नई पहल शुरू कर रहा है। अब इन कूड़ा उठाने वालों को आधिकारिक पहचान पत्र (ID Card) दिए जाएंगे। इस कदम से न केवल शहर की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि इन कर्मियों को भी सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलेगा।
MCD आईडी कार्ड क्यों जारी कर रहा है?
MCD का मुख्य उद्देश्य निवासियों की सुरक्षा को पुख्ता करना है ताकि कॉलोनियों और डीडीए फ्लैट्स में अनजान लोगों के प्रवेश को लेकर डर न रहे। यह पूरी प्रक्रिया ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE)’ योजना के तहत की जा रही है। इसके जरिए कूड़ा बीनने वालों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से कचरा निस्तारण के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
अब तक कितनी पहचान हुई और क्या है प्रक्रिया?
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 13,505 निजी कूड़ा उठाने वालों और बीनने वालों की पहचान की जा चुकी है। इन सभी की जानकारी की पुष्टि की जा रही है और दिल्ली पुलिस के जरिए इनका वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। पुलिस सत्यापन पूरा होने के बाद ही इन्हें आधिकारिक आईडी कार्ड जारी किए जाएंगे।
इन कर्मियों की कमाई और सामाजिक स्थिति
MCD द्वारा 2024 में किए गए एक सर्वे में सामने आया कि कूड़ा बीनने वाले लोग कचरे से निकलने वाले कबाड़ को बेचकर हर महीने करीब 18 से 20 हजार रुपये कमाते हैं। आईडी कार्ड मिलने से इन लोगों को ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और अन्य कॉलोनियों में सुरक्षित प्रवेश मिल सकेगा और समाज में उनकी स्थिति बेहतर होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MCD आईडी कार्ड किन लोगों को मिलेगा?
यह आईडी कार्ड दिल्ली की कॉलोनियों और सोसाइटी में काम करने वाले उन निजी कूड़ा उठाने वालों और बीनने वालों को मिलेगा जिनका पुलिस सत्यापन (Police Verification) सफल होगा।
NAMASTE योजना का इस पहल में क्या रोल है?
यह पहल NAMASTE योजना के तहत की जा रही है, जिसका लक्ष्य कूड़ा बीनने वालों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित तरीके से कूड़ा निस्तारण के लिए प्रशिक्षित करना है।