Delhi में कूड़े के पहाड़ खत्म करने के लिए लागू होगा Indore मॉडल, LG ने MCD को दिए निर्देश

Delhi: राजधानी दिल्ली में कचरे की समस्या से निपटने के लिए अब इंदौर के मशहूर स्वच्छता मॉडल को अपनाया जाएगा। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने MCD को निर्देश दिया है कि शहर के एक जोन में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर प

Delhi: राजधानी दिल्ली में कचरे की समस्या से निपटने के लिए अब इंदौर के मशहूर स्वच्छता मॉडल को अपनाया जाएगा। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने MCD को निर्देश दिया है कि शहर के एक जोन में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाए। यह कदम तब उठाया गया है जब दिल्ली का लगभग आधा कचरा अभी भी बिना किसी प्रोसेसिंग के सीधे डंपिंग साइट्स पर जा रहा है।

27 जुलाई 2026 को हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में LG ने इस बात पर चिंता जताई कि दिल्ली में कचरे को स्रोत पर अलग नहीं किया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 50% दैनिक कचरा सीधे लैंडफिल साइटों पर पहुंच रहा है, जिससे कूड़े के पहाड़ और बड़े होने का खतरा है। LG ने साफ किया कि लैंडफिल साइटों पर पहुंचने वाले ताजे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा होना चाहिए ताकि नए कूड़े के ढेर न लगें।

दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, शहर में पैदा होने वाले कुल कचरे का केवल 63% ही प्रोसेस हो पाता है। इसका मतलब है कि रोजाना करीब 4,200 टन कचरा बिना ट्रीटमेंट के ही छोड़ दिया जाता है। मार्च 2026 तक दिल्ली का औसत दैनिक कचरा उत्पादन बढ़कर 12,847 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। फिलहाल MCD क्षेत्रों में कचरा अलग करने का औसत 59% है, जिसे जनवरी 2027 तक 100% करने का लक्ष्य रखा गया है।

इंदौर मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वहां कचरे को घर से ही अलग-अलग श्रेणियों (जैसे गीला, सूखा, प्लास्टिक और ई-कचरा) में बांटा जाता है और फिर उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाता है। दिल्ली सरकार ने 2028 तक शहर के सभी कूड़े के पहाड़ों को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया है। इस मॉडल को समझने और लागू करने के लिए MCD की एक टीम इंदौर जाएगी।