Delhi: राजधानी दिल्ली में कुत्तों के काटने और रेबीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ा कदम उठाया है। निगम अगले दो साल के लिए 1.2 लाख एंटी-रेबीज वैक्सीन की शीशियां खरीदने की योजना बना रहा है। सोमवा
Delhi: राजधानी दिल्ली में कुत्तों के काटने और रेबीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ा कदम उठाया है। निगम अगले दो साल के लिए 1.2 लाख एंटी-रेबीज वैक्सीन की शीशियां खरीदने की योजना बना रहा है। सोमवार को अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है ताकि लोगों को समय पर इलाज मिल सके।
वैक्सीन कहां मिलेगी और कितना होगा खर्च?
MCD का अस्पताल प्रशासन विभाग इस पूरी प्रक्रिया को संभाल रहा है। 1 मिलीलीटर की इन वैक्सीन शीशियों के लिए दो साल का रेट कॉन्ट्रैक्ट किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 2.52 करोड़ रुपये है। ये टीके निगम द्वारा संचालित 280 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों, जैसे अस्पतालों, डिस्पेंसरी और मैटरनिटी सेंटर में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा 25 से ज्यादा समर्पित एंटी-रेबीज टीकाकरण केंद्रों पर भी इन्हें लगाया जाएगा।
कुत्तों के नियंत्रण के लिए क्या है प्लान?
MCD ने आवारा कुत्तों की आबादी कम करने और उन्हें सुरक्षित बनाने के लिए कई इंतजाम किए हैं। बजट 2026-27 में माइक्रोचिपिंग और टीकाकरण के लिए करीब 35 करोड़ रुपये रखे गए हैं। साथ ही, आक्रामक कुत्तों को रखने के लिए द्वारका में एक बड़ा शेल्टर बनाया जा रहा है, जिसमें 1,500 कुत्तों को रखा जा सकेगा। निगम पहले से ही 20 एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर चला रहा है।
रेबीज को लेकर सरकार का नया नियम क्या है?
दिल्ली सरकार ने जनवरी 2026 में एक अहम फैसला लेते हुए इंसानों में होने वाले रेबीज को ‘महामारी रोग अधिनियम’ के तहत एक अधिसूचित रोग घोषित किया है। इसका मतलब है कि अब रेबीज के मामलों की रिपोर्टिंग तेजी से होगी और सरकार इस पर ज्यादा कड़ी निगरानी रखेगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि 2025 में शहर में हजारों कुत्ते के काटने के मामले सामने आए थे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कुत्ते के काटने की शिकायत कहां करें?
MCD ने डॉग बाइट के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए हेल्पलाइन नंबर 155305 जारी किया है, जिस पर नागरिक संपर्क कर सकते हैं।
वैक्सीन की कमी क्यों हो रही थी?
मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जग प्रवेश चंद्र अस्पताल और डॉ. हेडगेवार आरोग्य संस्थान जैसे केंद्रों में वैक्सीन की कमी थी, जिससे GTB अस्पताल में रोजाना 2000 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे थे।