Delhi: दिल्ली के रिहायशी इलाकों में घरों को दुकान या ऑफिस की तरह इस्तेमाल करने वालों के लिए मुश्किल बढ़ने वाली है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अब ऐसे घरों की मैपिंग शुरू कर दी है। लंबे समय से रिहायशी मकानों का कमर्शियल इस्त
Delhi: दिल्ली के रिहायशी इलाकों में घरों को दुकान या ऑफिस की तरह इस्तेमाल करने वालों के लिए मुश्किल बढ़ने वाली है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अब ऐसे घरों की मैपिंग शुरू कर दी है। लंबे समय से रिहायशी मकानों का कमर्शियल इस्तेमाल एक बड़ी समस्या बना हुआ था, जिसे अब सख्ती से रोकने की तैयारी है।
MCD की मैपिंग और सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अप्रैल 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों को निर्देश दिया था कि वे रिहायशी इलाकों का सर्वे करें। कोर्ट ने कहा है कि उन जगहों की पहचान की जाए जहाँ नियम तोड़कर दुकान, ऑफिस, कोचिंग सेंटर या हॉस्टल चलाए जा रहे हैं। MCD को इस सर्वे की पूरी रिपोर्ट 15 मई 2026 तक जमा करनी होगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?
दिल्ली के मास्टर प्लान (MPD 2021) के मुताबिक रिहायशी और कमर्शियल इलाकों के नियम अलग-अलग हैं। नियमों का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है:
- बिना अनुमति कमर्शियल काम करने वाले ढांचों को सील या गिराया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि रिहायशी फ्लोर को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए कन्वर्जन चार्ज देना होगा।
- MCD पहले ही टैक्स न भरने वाली कमर्शियल प्रॉपर्टीज को सील कर चुका है, जैसे केशवपुरम जोन में दो संपत्तियां सील की गईं।
अनधिकृत कॉलोनियों के लिए क्या है नई पॉलिसी?
सरकार ने 8 अप्रैल 2026 को अनधिकृत कॉलोनियों के लिए एक नई पॉलिसी निकाली है। इसके तहत 20 वर्ग मीटर तक की छोटी कमर्शियल बिल्डिंग्स और रिहायशी मकानों को नियमित करने की कोशिश की जाएगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पॉलिसी की जानकारी दी थी, ताकि छोटे दुकानदारों और मकान मालिकों को कानूनी सिस्टम से जोड़ा जा सके।