Delhi, Maharashtra समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने दी चेतावनी

Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून की पहली जोरदार बारिश के बाद अब आने वाले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 7 जुलाई को दिल्ली में मानसून के आने के बाद अब तक की सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर के कई इलाकों

Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून की पहली जोरदार बारिश के बाद अब आने वाले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 7 जुलाई को दिल्ली में मानसून के आने के बाद अब तक की सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर के कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या हो गई। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, शनिवार 11 जुलाई तक दिल्ली में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी।

दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में 7 जुलाई को सुबह 8:30 से शाम 5:30 के बीच 84mm बारिश हुई। इस भारी बारिश का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा, जहां IGI एयरपोर्ट पर 300 से ज्यादा फ्लाइट्स लेट हुईं और एक इंटरनेशनल फ्लाइट को डायवर्ट करना पड़ा। IMD ने बुधवार और गुरुवार के लिए दिल्ली में येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ हवाएं चल सकती हैं।

महाराष्ट्र में हालात और भी गंभीर हैं। मुंबई में भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण मंगलवार को स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी रखी गई और सभी पार्कों को बंद कर दिया गया। पालघर में सबसे ज्यादा 203.3 mm बारिश रिकॉर्ड की गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य को हाई अलर्ट पर रखा है और नासिक में क्लाउडबर्स्ट (बादल फटने) की आशंका जताई है। पुणे जिले में पिछले दो दिनों में 22 लैंडस्लाइड की खबरें आई हैं, जबकि NDRF और SDRF की टीमों को तैनात किया गया है।

देश के अन्य हिस्सों की बात करें तो केरल के वायनाड में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन में तीन लोगों की मौत हो गई और पांच लोग लापता हैं। अरुणाचल प्रदेश में भी भारी बारिश से बाढ़ और लैंडस्लाइड आए हैं, जिससे करीब 94,000 लोग प्रभावित हुए हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा में 7 जुलाई को 61.4 mm बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है।

IMD के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में मानसून राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर अरब सागर के बाकी हिस्सों को कवर कर लेगा, जिससे पूरा देश मानसून की चपेट में होगा। हालांकि, IMD ने इस साल कुल मानसून बारिश के अनुमान को घटाकर सामान्य से 90% कर दिया है, जिसका मुख्य कारण एल नीनो (El Niño) का प्रभाव बताया जा रहा है।