Delhi: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में सरकारी निगमों द्वारा चलाई जा रही शराब की दुकानों के कामकाज और उनके पैसों के हिसाब-किताब की गहरी जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने 12 अप्रैल 2026 को साफ कहा कि पि
Delhi: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में सरकारी निगमों द्वारा चलाई जा रही शराब की दुकानों के कामकाज और उनके पैसों के हिसाब-किताब की गहरी जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने 12 अप्रैल 2026 को साफ कहा कि पिछले 5 सालों के दौरान हुए हर लेनदेन का ऑडिट किया जाएगा ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को पकड़ा जा सके। यह फैसला उन शिकायतों और रिपोर्टों के बाद लिया गया है जिनमें सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि खातों में किसी भी तरह की हेराफेरी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
किन निगमों की होगी जांच और क्या है पूरा मामला?
सरकार के इस फैसले की जद में दिल्ली के वो चार बड़े निगम आएंगे जो शहर में 700 से ज्यादा शराब की दुकानें चलाते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक हाल के निष्कर्षों से पता चला है कि कुछ संस्थाओं के खातों का लंबे समय से ठीक से मिलान नहीं किया गया था। इसकी वजह से सरकारी पैसे के गबन और रिकॉर्ड में हेराफेरी का खतरा बढ़ गया है। इन एजेंसियों को आबकारी विभाग के साथ मिलकर रिकॉर्ड के सत्यापन के लिए काम करने को कहा गया है। जांच के दायरे में आने वाले निगम इस प्रकार हैं:
- दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक भंडार (DCCWS)
- दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (DTTDC)
- दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (DSCSC)
- दिल्ली राज्य औद्योगिक और अवसंरचना विकास निगम (DSIIDC)
क्या-क्या चेक किया जाएगा और कब तक आएगी रिपोर्ट?
मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिया है कि ऑडिट के दौरान शराब की खरीद, बिक्री, दुकान में मौजूद स्टॉक और कैश के रिकॉर्ड का बारीक मिलान किया जाए। आबकारी आयुक्त खुद इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से जांच करेंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस पूरी प्रक्रिया के लिए समय सीमा भी तय कर दी गई है।
| विवरण |
महत्वपूर्ण जानकारी |
| ऑडिट की अवधि |
पिछले 5 साल का रिकॉर्ड |
| रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा |
2 महीने के भीतर |
| PAC रिपोर्ट में अनुमानित नुकसान |
2026.91 करोड़ रुपये |
| अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट की तारीख |
31 जनवरी 2027 |
यह ऑडिट दिल्ली विधानसभा की लोक लेखा समिति (PAC) की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें आबकारी नीति के कार्यान्वयन में गंभीर कमियों और राजस्व के बड़े नुकसान का खुलासा हुआ था। संबंधित विभागों को अब दो महीने के भीतर वित्त विभाग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।