Delhi: दिल्ली के वकीलों के बीच कोर्ट के अधिकार क्षेत्र (Pecuniary Jurisdiction) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिला अदालतों की वित्तीय सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने की मांग पर वकील दो गुटों में
Delhi: दिल्ली के वकीलों के बीच कोर्ट के अधिकार क्षेत्र (Pecuniary Jurisdiction) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिला अदालतों की वित्तीय सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने की मांग पर वकील दो गुटों में बंट गए हैं। इस विरोध के चलते Delhi High Court Bar Association (DHCBA) ने सोमवार, 25 मई 2026 को न्यायिक काम से दूर रहने का फैसला किया है।
क्या है पूरा विवाद और क्यों हो रहा है विरोध?
मामला जिला अदालतों की उस सीमा से जुड़ा है जिसके आधार पर तय होता है कि केस हाई कोर्ट में जाएगा या जिला कोर्ट में। अभी यह सीमा 2 करोड़ रुपये है, जिसे बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने की मांग की जा रही है। जिला अदालतों के वकील चाहते हैं कि यह सीमा बढ़े ताकि आम जनता को अपने घर के पास ही सस्ता और आसान न्याय मिल सके। वहीं, हाई कोर्ट के वकीलों का मानना है कि इससे उनके पेशेवर हितों और रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ेगा।
दोनों पक्षों के मुख्य तर्क क्या हैं?
- DHCBA का पक्ष: सीनियर एडवोकेट Sacchin Puri के मुताबिक, इस बदलाव से न्याय प्रणाली पर बुरा असर पड़ेगा। उनका कहना है कि यह फैसला केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय को लेना चाहिए, हाई कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।
- कोऑर्डिनेशन कमेटी का पक्ष: एडवोकेट Tarun Rana और D K Sharma का कहना है कि महंगाई के दौर में यह बदलाव जरूरी है। इससे आम लोगों को कोर्ट के चक्कर कम काटने पड़ेंगे और केस जल्दी सुलझेंगे।
अब आगे क्या होगा और कौन सी कमेटी कर रही है जांच?
इस विवाद को सुलझाने के लिए Delhi High Court ने छह जजों की एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी में जस्टिस V Kameswar Rao, N W Sambre, Dinesh Kumar Sharma, Vivek Chaudhary, Prathiba M Singh और Navin Chawla शामिल हैं। यह कमेटी सभी पक्षों से सलाह लेकर अपनी सिफारिशें देगी। इससे पहले 2 जनवरी 2024 को दिल्ली सरकार और LG ने सिविल जजों की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने को मंजूरी दी थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Pecuniary Jurisdiction बढ़ाने से आम आदमी को क्या फायदा होगा?
अगर जिला अदालतों की सीमा 2 करोड़ से बढ़कर 20 करोड़ होती है, तो बड़े मूल्य के केस भी जिला कोर्ट में चल सकेंगे। इससे लोगों को हाई कोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे कानूनी खर्च कम होगा और न्याय जल्दी मिल सकेगा।
DHCBA ने हड़ताल का फैसला क्यों लिया?
DHCBA का मानना है कि सीमा बढ़ाने से हाई कोर्ट में आने वाले केस कम हो जाएंगे, जिससे वहां प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की कमाई और पेशेवर हितों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।