Delhi के तीस हजारी कोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग

Delhi: राजधानी दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में शनिवार को 60 से ज्यादा वकील इकट्ठा हुए और पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ अपना विरोध जताया। ये वकील 20 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान

Delhi: राजधानी दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में शनिवार को 60 से ज्यादा वकील इकट्ठा हुए और पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ अपना विरोध जताया। ये वकील 20 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस हमले के खिलाफ नाराज थे। वकीलों ने कोर्ट परिसर में राष्ट्रगान गाया और संविधान की प्रस्तावना पढ़कर अपनी बात रखी।

वकीलों का आरोप है कि 20 जुलाई को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस तरह की कार्रवाई से अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में पड़ती है। प्रदर्शनकारी वकीलों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषी पुलिस अधिकारियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

इस मामले में कानूनी हलचल काफी बढ़ गई है। Supreme Court Bar Association (SCBA) और SCAORA ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की है। SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना उकसावे के लाठीचार्ज किया, आंसू गैस का इस्तेमाल किया और महिलाओं व नाबालिगों के साथ भी बदसलूकी की।

वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस घटना से जुड़े सभी सबूत, जैसे CCTV फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए अपने जवानों की सभी नियमित छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

इस विवाद में अब रिटायर्ड सिविल सर्वेंट्स भी कूद पड़े हैं। 93 पूर्व अधिकारियों ने एक पत्र लिखकर बताया कि निहत्थे छात्रों पर पेलेट्स और टेजर का इस्तेमाल किया गया। CJP ने एक वेबसाइट भी शुरू की है ताकि लोग पुलिस कर्मियों की फोटो और वीडियो अपलोड कर सकें और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।