Delhi के जंतर-मंतर पर 7 अगस्त को महिलाओं का बड़ा प्रदर्शन, 33% आरक्षण बिल तुरंत लागू करने की मांग

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 7 अगस्त 2026 को महिला आरक्षण बिल को लेकर एक बड़ा धरना-प्रदर्शन होने जा रहा है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया है। महिलाओं की मांग है कि संसद और

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 7 अगस्त 2026 को महिला आरक्षण बिल को लेकर एक बड़ा धरना-प्रदर्शन होने जा रहा है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया है। महिलाओं की मांग है कि संसद और विधानसभाओं में उनके लिए तय 33 प्रतिशत आरक्षण को बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाए। इस आंदोलन में बिहार से भी बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है।

यह विरोध प्रदर्शन 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलने वाले एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जो संसद के मानसून सत्र के दौरान आयोजित किया जा रहा है। महिला संगठनों का कहना है कि आरक्षण को जनगणना और परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया से जोड़कर रखा गया है, जिसकी वजह से इसे लागू करने में बहुत समय लग रहा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि आरक्षण को इन प्रक्रियाओं से अलग किया जाए ताकि महिलाओं को तुरंत उनका हक मिल सके।

हाल ही में 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया था, जिसका मकसद 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करके आरक्षण प्रक्रिया को तेज करना था। लेकिन यह बिल जरूरी बहुमत नहीं जुटा पाया और गिर गया। सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

सरकार की ओर से गृह मंत्री Amit Shah और संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं को आरक्षण देने का मौका गंवा दिया। वहीं, विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण वाला बिल नहीं है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री Ramdas Athawale ने भरोसा जताया था कि मानसून सत्र में आरक्षण और परिसीमन बिल पास हो जाएंगे, लेकिन 28 जुलाई के नतीजों ने इस उम्मीद को तोड़ दिया।

इस प्रदर्शन के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में माहौल काफी सख्त है। पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया से प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट हटाए जाने और इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी जैसी खबरें भी सामने आई हैं। AIDWA की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जगमती सांगवान और AIPWA की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी जैसे नेता इस मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।