Delhi के जंतर-मंतर लाठीचार्ज में घायल साक्षी की हालत स्थिर, RML अस्पताल ने दी जानकारी

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुई 21 वर्षीय साक्षी की हालत अब स्थिर है। डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुई 21 वर्षीय साक्षी की हालत अब स्थिर है। डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और वह अब होश में हैं।

अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, साक्षी को 22 जुलाई को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया गया था। अब वह खुद सांस ले रही हैं और डॉक्टरों के सवालों का जवाब भी दे रही हैं। उनके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के MRI स्कैन की रिपोर्ट सामान्य आई है। RML अस्पताल में इस घटना से जुड़े केवल साक्षी ही भर्ती हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर साक्षी की मौत की खबरों को गलत बताते हुए उनकी स्थिति स्थिर होने की पुष्टि की है।

यह पूरा मामला NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरॉच जनता पार्टी (CJP) द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में अन्य लोग भी घायल हुए थे। साहिल नाम के एक प्रदर्शनकारी की आंख में चोट लगी है, जिन्हें AIIMS के राजेंद्र प्रसाद सेंटर रेफर किया गया है, जहां उनकी दृष्टि वापस आने की उम्मीद कम है। वहीं शेख इरशाद आंसू गैस के गोले से घायल हुए और उनका इलाज लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि 20 जुलाई को न्यू दिल्ली जिले में धारा 163 लागू थी, जिसके तहत सभाओं पर रोक थी। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्के बल का इस्तेमाल किया गया। इस घटना में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और कई सरकारी गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ 10 FIR दर्ज की हैं और अब ड्यूटी पर सभी पुलिसकर्मियों को वर्दी में रहने का निर्देश दिया गया है।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस विरोध प्रदर्शन की जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर सरकार छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने का भरोसा देती है, तो वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे।