Delhi: भारत की राजधानी दिल्ली में 1 जून 2026 से इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) का पहला बड़ा समिट होने जा रहा है। इस कार्यक्रम का मकसद दुनिया भर में बाघ, शेर और चीता जैसे बड़े वन्य जीवों को बचाने और उनके रहने की जगहों को
Delhi: भारत की राजधानी दिल्ली में 1 जून 2026 से इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) का पहला बड़ा समिट होने जा रहा है। इस कार्यक्रम का मकसद दुनिया भर में बाघ, शेर और चीता जैसे बड़े वन्य जीवों को बचाने और उनके रहने की जगहों को सुरक्षित करने पर चर्चा करना है। इस समिट में कई देशों के बड़े अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
समिट में क्या खास होगा और कौन लेगा हिस्सा
यह समिट 1 जून से 2 जून 2026 तक दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे और ग्लोबल बिग कैट्स फोटोग्राफी कॉम्पिटिशन 2026 के विजेताओं को सम्मानित करेंगे। समिट की थीम ‘Save Big Cats, Save Humanity, Save Ecosystem’ रखी गई है। इसमें दुनिया भर के 95 देशों को न्योता भेजा गया है, जिनमें से 14 देशों ने अपनी भागीदारी पक्की कर दी है।
दिल्ली घोषणापत्र और वन्यजीवों का महत्व
इस समिट के दौरान ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’ (Delhi Declaration) को अपनाया जाएगा। यह दुनिया का पहला ऐसा दस्तावेज होगा जो बड़े वन्य जीवों के संरक्षण के लिए साझा प्राथमिकताओं और आपसी सहयोग पर जोर देगा। IBCA के महानिदेशक एसपी यादव ने बताया कि इन जानवरों को बचाना सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए भी जरूरी है।
IBCA के बारे में जरूरी जानकारी
- स्थापना: पीएम मोदी ने 2023 में प्रोजेक्ट टाइगर की 50वीं वर्षगांठ पर इसकी शुरुआत की थी।
- मकसद: दुनिया के सात प्रमुख बड़े बिल्लियों (टाइगर, लायन, लेपर्ड, स्नो लेपर्ड, चीता, जगुआर और प्यूमा) का संरक्षण करना।
- सदस्य: अब तक 25 देश इसके सदस्य हैं और सऊदी अरब 26वें सदस्य के तौर पर जुड़ने वाला है।
- नेतृत्व: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव IBCA के अध्यक्ष हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) समिट कब और कहाँ होगा?
यह समिट 1 जून से 2 जून 2026 तक नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित किया जाएगा।
IBCA किन जानवरों के संरक्षण पर काम करता है?
यह संगठन दुनिया के सात बड़े वन्य जीवों—बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण के लिए काम करता है।