Delhi: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर यात्रियों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। GMR Airports के चेयरमैन GBS Raju ने बताया कि ईरान युद्ध जैसी अंतरराष्ट्रीय स्थितियों के बावजूद एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले
Delhi: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर यात्रियों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। GMR Airports के चेयरमैन GBS Raju ने बताया कि ईरान युद्ध जैसी अंतरराष्ट्रीय स्थितियों के बावजूद एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। 28 फरवरी से पहले जितने यात्री रोजाना सफर कर रहे थे, अब भी लगभग उतने ही लोग फ्लाइट ले रहे हैं।
एयरपोर्ट की क्षमता और यात्रियों का डेटा क्या है?
GMR ग्रुप ने दिल्ली एयरपोर्ट को इस तरह तैयार किया है कि यहाँ साल भर में 10.5 करोड़ यात्री सफर कर सकें। पिछले वित्त वर्ष (FY26) में यहाँ करीब 7.9 करोड़ यात्री आए। फिलहाल एयरपोर्ट के तीन टर्मिनल और चार रनवे हैं। तकनीक में सुधार और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की ट्रेनिंग के बाद अब यहाँ रोजाना 1,700 की जगह 2,000 से ज्यादा विमानों की आवाजाही संभव हो सकेगी।
यात्रियों के लिए क्या नई सुविधाएं आने वाली हैं?
एयरपोर्ट को और बेहतर बनाने के लिए GMR ग्रुप अब Automated People Mover (APM) प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब 30 महीने का समय लगेगा और इसके लिए जल्द ही टेंडर निकाले जाएंगे। इसके अलावा, शहर से एयरपोर्ट तक पहुँचने वाले रास्तों और कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम किया जा रहा है ताकि यात्रियों को आने-जाने में आसानी हो।
GMR ग्रुप का सफर और भविष्य की योजना
इस महीने GMR ग्रुप ने अपने पहले कंसेशन पीरियड के 20 साल पूरे कर लिए हैं। कंपनी का मानना है कि दुनिया में चल रही उथल-पुथल का असर थोड़े समय के लिए हो सकता है, लेकिन भारत में हवाई यात्रा का कारोबार तेजी से बढ़ेगा। कंपनी का पूरा फोकस अब एयरपोर्ट के अंदर और बाहर की सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली एयरपोर्ट पर सालाना कितने यात्री आ सकते हैं?
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने अपनी क्षमता 10.5 करोड़ यात्रियों तक बढ़ा दी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यहाँ लगभग 7.9 करोड़ यात्री पहुंचे।
Automated People Mover (APM) प्रोजेक्ट क्या है और कब तक पूरा होगा?
यह एयरपोर्ट के अंदर यात्रियों के आवागमन को आसान बनाने वाला ऑटोमैटिक सिस्टम है, जिसे पूरा होने में करीब 30 महीने का समय लगेगा।