Delhi: इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर एक बार फिर GPS स्पूफिंग का मामला सामने आया है। यह घटना शनिवार, 24 मई 2026 को उस समय हुई जब अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio दिल्ली पहुंचे थे। उनके आने के कुछ ही घंटों बाद
Delhi: इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर एक बार फिर GPS स्पूफिंग का मामला सामने आया है। यह घटना शनिवार, 24 मई 2026 को उस समय हुई जब अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio दिल्ली पहुंचे थे। उनके आने के कुछ ही घंटों बाद एयरपोर्ट के पास उड़ रहे करीब 10 से 12 विमानों ने नेविगेशन में दिक्कत की शिकायत की।
GPS स्पूफिंग से विमानों पर क्या असर पड़ा
इस साइबर हमले की वजह से पायलटों को गलत लोकेशन की जानकारी मिल रही थी, जो असल जगह से 2,500 किलोमीटर तक दूर दिखा सकती है। सुरक्षा के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमानों के बीच की दूरी 3 नॉटिकल मील से बढ़ाकर 5 नॉटिकल मील कर दी। इससे हवाई अड्डे पर भीड़ बढ़ गई और कुछ फ्लाइट्स में देरी भी हुई।
फ्लाइट्स को सुरक्षित कैसे उतारा गया
जब GPS काम करना बंद कर देता है, तो कंट्रोलर पुराने तरीके अपनाते हैं और रडार के जरिए विमानों को गाइड करते हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने संसद में बताया कि बैकअप सिस्टम की वजह से सभी उड़ानें सुरक्षित रहीं। DGCA ने अब पायलटों को निर्देश दिया है कि अगर GPS में कोई भी गड़बड़ी दिखे, तो उसकी जानकारी 10 मिनट के भीतर दें।
कौन कर रहा है इस मामले की जांच
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल के ऑफिस ने इस गंभीर मामले की जांच शुरू कर दी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने वायरलेस मॉनिटरिंग ऑर्गनाइजेशन (WMO) से मदद मांगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये फर्जी सिग्नल कहां से भेजे जा रहे हैं। दिल्ली के अलावा कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर भी ऐसे मामले देखे गए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
GPS स्पूफिंग क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
यह एक तरह का साइबर हमला है जिसमें असली सैटेलाइट सिग्नल की जगह फर्जी रेडियो सिग्नल भेजे जाते हैं। इससे पायलट को विमान की गलत लोकेशन दिखाई देती है, जिससे नेविगेशन में गड़बड़ी हो सकती है।
क्या इस हमले से यात्रियों की जान को खतरा था?
नहीं, नागरिक उड्डयन मंत्री के अनुसार बैकअप नेविगेशन सिस्टम और रडार वेक्टर्स के इस्तेमाल से सभी विमानों को सुरक्षित तरीके से संचालित किया गया।