Delhi में पेड़ काटने के नियम पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को चेतावनी- आदेश नहीं माना तो होगी अवमानना
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई को लेकर सरकार की ढील पर कड़ा गुस्सा जताया है। जस्टिस जसमीत सिंह ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि अगर पेड़ काटने की छूट देने वाले नियम को वापस नहीं लिया गया, तो कोर्ट अवमानना क
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई को लेकर सरकार की ढील पर कड़ा गुस्सा जताया है। जस्टिस जसमीत सिंह ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि अगर पेड़ काटने की छूट देने वाले नियम को वापस नहीं लिया गया, तो कोर्ट अवमानना की कार्रवाई शुरू करेगा। कोर्ट ने सरकार के इस नोटिफिकेशन को बेहद खराब बताया और कहा कि इस तरह के फैसलों से दिल्ली रेगिस्तान बन जाएगी।
पूरा मामला जून 2025 में दिल्ली वन विभाग द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन से जुड़ा है। इस नियम के मुताबिक, अगर कोई पेड़ जान-माल या ट्रैफिक के लिए खतरा माना जाता है, तो जमीन के मालिक को उसे काटने से पहले ट्री ऑफिसर को बताने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, पुल, अंडरपास और सीवर लाइन जैसे निर्माण कार्यों को भी इमरजेंसी बताकर पेड़ों की कटाई की छूट दे दी गई थी। जस्टिस जसमीत सिंह ने इसे कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन माना है।
कोर्ट ने पाया कि सरकार ने बिना किसी सुरक्षा उपाय के और बिना किसी विकल्प पर विचार किए पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी। जस्टिस सिंह ने साफ कहा कि कोई भी सरकारी विभाग हाई कोर्ट से ऊपर नहीं है और इस तरह के नोटिफिकेशन कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर देते हैं। याचिकाकर्ता लक्ष्य मंगल के वकील आदित्य एन. प्रसाद ने भी आरोप लगाया कि इमरजेंसी के नाम पर दिल्ली में अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं।
इससे पहले मई 2023 में भी कोर्ट ने आदेश दिया था कि 15.7 सेंटीमीटर तक की टहनियों की छंटाई के लिए अनुमति जरूरी है, लेकिन सरकार ने मई 2025 में एक नया SOP जारी कर इस नियम को बदलने की कोशिश की थी, जिसे कोर्ट ने रोक दिया था। अब हाई कोर्ट ने सरकार को 7 जुलाई 2026 तक इस छूट वाले प्रावधान को हटाने का समय दिया था। मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को कोर्ट ने अपनी बात दोहराते हुए सरकार को एक हफ्ते का आखिरी मौका दिया है, वरना कानूनी कार्रवाई की जाएगी।