Delhi High Court का बड़ा फैसला, दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने वाले पति की उम्रकैद बरकरार
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में यह साफ कर दिया है कि दहेज का लालच सिर्फ अमीर लोगों तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने अपनी पत्नी रोशन की हत्या के दोषी पति सिराजुद्दीन की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने माना
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में यह साफ कर दिया है कि दहेज का लालच सिर्फ अमीर लोगों तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने अपनी पत्नी रोशन की हत्या के दोषी पति सिराजुद्दीन की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने माना कि दहेज जैसी सामाजिक बुराई समाज के हर तबके में फैली है और कई बार गरीब परिवार ही इसकी सबसे भारी कीमत चुकाते हैं।
यह मामला साल 1998 का है जब रोशन की दहेज के लालच में हत्या कर दी गई थी। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एक गरीब परिवार में स्कूटर, फ्रिज और रंगीन टीवी जैसे दहेज की मांग नहीं हो सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि लालच और दहेज की गैरकानूनी चाहत किसी खास आर्थिक वर्ग की मोहताज नहीं होती।
फैसले के दौरान कोर्ट ने रोशन द्वारा अपनी मौत से पहले डॉक्टर, पुलिस और एसडीएम को दिए गए बयानों को विश्वसनीय माना। साथ ही यह बात भी सामने आई कि आरोपी सिराजुद्दीन घटना के बाद फरार हो गया था और वह अपनी गंभीर रूप से झुलसी पत्नी से मिलने अस्पताल तक नहीं पहुंचा।
कानूनी प्रावधानों की बात करें तो कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (दहेज क्रूरता) और धारा 302 (हत्या) के तहत दोषसिद्धि को सही माना, हालांकि धारा 304B (दहेज मृत्यु) के तहत सजा को रद्द कर दिया। सिराजुद्दीन की सजा पर साल 2005 से रोक लगी हुई थी। अब कोर्ट ने उसे निर्देश दिया है कि वह दो हफ्ते के भीतर जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करे ताकि वह अपनी बची हुई उम्रकैद की सजा पूरी कर सके।