Delhi: कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च में पुलिसिया कार्रवाई पर हाईकोर्ट में सुनवाई बुधवार को, याचिका में लगाया बल प्रयोग का आरोप

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार, 22 जुलाई 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। यह याचिका Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद मार्च’ के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए कथित अत्यधिक बल प्र

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार, 22 जुलाई 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। यह याचिका Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद मार्च’ के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए कथित अत्यधिक बल प्रयोग के खिलाफ दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की डिवीजन बेंच करेगी।

यह पूरा विवाद सोमवार, 20 जुलाई 2026 को शुरू हुआ जब कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘संसद चलो’ मार्च निकाला था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। मंगलवार को जब इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए कोर्ट के सामने रखा गया, तो बेंच ने इसे बुधवार के लिए तय किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट को इन सब मामलों में न घसीटा जाए, लेकिन फिर भी याचिका को लिस्ट करने पर सहमति जताई।

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को लेकर अब तक पांच FIR दर्ज की हैं और दो और दर्ज होने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी उग्र थे और उन्होंने पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की। पुलिस के मुताबिक, चेतावनी के बाद भी लोग नहीं हटे और उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों समेत 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने किसी भी तरह के अत्यधिक बल प्रयोग से इनकार किया है और कहा है कि स्थिति को पेशेवर तरीके से संभाला गया।

वहीं, Cockroach Janta Party के अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने लाठीचार्ज और मारपीट की, जिसमें महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बनाया गया। CJP एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन है जो NEET परीक्षा की अनियमितताओं का विरोध कर रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस विरोध प्रदर्शन से जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जुड़े हुए हैं।

इस मामले में अन्य कानूनी पहलू भी सामने आए हैं। एडवोकेट अंशुल कुमार ने बल प्रयोग के खिलाफ PIL दाखिल की है, जबकि सीनियर एडवोकेट नंदिता राव और पूर्व JNUSU अध्यक्ष आयशा घोष ने प्रदर्शनकारियों की पुलिस निगरानी (surveillance) को लेकर अलग से याचिकाएं दायर की हैं। प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली जिले में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई थीं।