Delhi में जिला जज विनय सिंघल सस्पेंड, नियमों के खिलाफ जाकर नीलामीकर्ता नियुक्त करने का आरोप

Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीस हजारी कोर्ट के जिला और प्रधान न्यायाधीश विनय सिंघल को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह फैसला अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू होने तक लागू रहेगा। निलंबन का आदेश दि

Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीस हजारी कोर्ट के जिला और प्रधान न्यायाधीश विनय सिंघल को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह फैसला अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू होने तक लागू रहेगा। निलंबन का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज ने 10 जुलाई 2026 को जारी किया था, जिसे कोर्ट की पूर्ण पीठ ने मंजूरी दी है।

यह पूरा मामला 20 अगस्त 2025 को मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय को मिली एक शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत के बाद सतर्कता जांच (vigilance probe) बिठाई गई थी। जांच में यह बात सामने आई कि विनय सिंघल ने कथित तौर पर अयोग्य वकीलों को कोर्ट के नीलामीकर्ता (auctioneer) के रूप में नियुक्त किया था। साथ ही उन पर ऐसे न्यायिक आदेश पारित करने का आरोप है, जिससे नियमों की तय सीमा से ज्यादा भुगतान लिया जा सके। जांच में न्यायिक अधिकारी और कुछ लाभार्थियों के बीच मिलीभगत की आशंका जताई गई है।

निलंबन के दौरान विनय सिंघल के लिए कुछ कड़ी शर्तें तय की गई हैं। उन्हें सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना दिल्ली शहर छोड़ने की मनाही है। उनका मुख्यालय तीस हजारी कोर्ट में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कार्यालय ही रहेगा। हालांकि, सेवा नियमों के मुताबिक उन्हें इस अवधि के दौरान निर्वाह भत्ता और अन्य जरूरी भत्ते मिलते रहेंगे।

यह कार्रवाई दिल्ली हायर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स 1970 के नियम 27 और अखिल भारतीय सेवा नियमों के तहत की गई है। ये नियम हाईकोर्ट को यह अधिकार देते हैं कि अगर किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ जांच या अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही हो, तो उसे सस्पेंड किया जा सकता है।