Delhi में आवारा कुत्तों का आतंक, High Court ने MCD और सरकार से मांगा रिपोर्ट, अब होगी सख्त निगरानी

Delhi: राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उनके आतंक को देखते हुए Delhi High Court ने एक बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट ने खुद से (suo motu) एक जनहित याचिका शुरू की है ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशो

Delhi: राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उनके आतंक को देखते हुए Delhi High Court ने एक बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट ने खुद से (suo motu) एक जनहित याचिका शुरू की है ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन सही से हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की जा सके। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार और MCD से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है और आम लोग इससे काफी परेशान हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हर दिन डॉग बाइट की खबरें आती हैं और अब पशु कल्याण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि आवारा कुत्ते खुद हाई कोर्ट के परिसर में भी नजर आते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिए थे कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। नियम यह है कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद इन कुत्तों को वापस उन्हीं जगहों पर नहीं छोड़ा जाएगा। इसके अलावा हर जिले में कम से कम एक चालू Animal Birth Control (ABC) सेंटर होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि इन नियमों को लागू कराने की पूरी जिम्मेदारी राज्य के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) की होगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है।

Delhi High Court ने अब दिल्ली सरकार, MCD और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि नसबंदी, टीकाकरण और कुत्तों के शेल्टर होम को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

महत्वपूर्ण तारीख विवरण
23 जुलाई 2026 Delhi High Court ने suo motu PIL शुरू की
31 जुलाई 2026 दिल्ली सरकार और MCD को स्टेटस रिपोर्ट जमा करने की डेडलाइन
3 अगस्त 2026 मामले की अगली सुनवाई की तारीख
7 नवंबर 2025 सुप्रीम कोर्ट का पहला निर्देश (संस्थागत परिसर से कुत्तों को हटाना)
19 मई 2026 सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव से इनकार किया