Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर दो वकीलों को निशाना बनाकर पोस्ट डालने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने इन मानहानिकारक और सांप्रदायिक पोस्ट के सर्कुलेशन पर रोक लगा दी है। यह आदेश उन अज्ञात लोगों के खिला
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर दो वकीलों को निशाना बनाकर पोस्ट डालने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने इन मानहानिकारक और सांप्रदायिक पोस्ट के सर्कुलेशन पर रोक लगा दी है। यह आदेश उन अज्ञात लोगों के खिलाफ जारी किया गया है जिन्होंने राजनीतिक और धार्मिक नफरत फैलाने वाली सामग्री शेयर की थी।
कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल, 2026 को ‘जॉन डो’ आदेश पारित किया। इसका मतलब है कि यह आदेश उन सभी अज्ञात व्यक्तियों और अकाउंट्स पर लागू होगा जिन्होंने आपत्तिजनक पोस्ट डाले थे। कोर्ट ने X Corp. (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे ऐसी सामग्री को तुरंत हटाएं। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना गलत है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
पोस्ट में किस तरह की आपत्तिजनक बातें थीं
अदालत ने पाया कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री बेहद अपमानजनक और अश्लील थी। इसमें न केवल सांप्रदायिक नफरत फैलाई गई, बल्कि शारीरिक और यौन हिंसा की धमकियां भी दी गई थीं। कोर्ट ने इसे एक सुनियोजित अभियान माना, जो विपरीत राजनीतिक विचारधारा रखने वाले लोगों द्वारा चलाया गया था। इसमें वकीलों के निजी जीवन और उनकी राजनीतिक सोच को गलत तरीके से पेश किया गया था।
आम लोगों और पेशेवरों पर क्या असर होगा
अदालत ने चेतावनी दी कि इस तरह की पोस्ट से किसी व्यक्ति के करियर और सम्मान को ऐसी चोट पहुंचती है जिसकी भरपाई पैसों से नहीं की जा सकती। कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी और किसी की इज्जत के बीच संतुलन बनाने की बात कही। यह फैसला उन लोगों के लिए एक संदेश है जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके किसी की छवि खराब करने या समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं।