Delhi High Court ने मांगा Sonam Wangchuk का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड, सफदरजंग अस्पताल से मेदांता शिफ्ट करने की मांग पर सुनवाई जारी
Delhi: जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk की सेहत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल से उनके पूरे मेडिकल रिकॉर्ड मांगे हैं और साफ कहा है कि टेस्ट रिपोर्ट मरीज की असल हालत से मेल खानी च
Delhi: जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk की सेहत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल से उनके पूरे मेडिकल रिकॉर्ड मांगे हैं और साफ कहा है कि टेस्ट रिपोर्ट मरीज की असल हालत से मेल खानी चाहिए। यह मामला तब बढ़ा जब उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो ने उन्हें सफदरजंग से मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने की मांग को लेकर अपील की थी।
सोमवार को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल को आदेश दिया है कि वे AIIMS और अन्य प्राइवेट लैब की सभी पैथोलॉजी रिपोर्ट और हेल्थ बुलेटिन के साथ एक विस्तृत हलफनामा जमा करें। साथ ही डॉ. अंगमो को भी प्राइवेट लैब से मिली रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ लैब रिपोर्ट से मरीज की स्थिति का पता नहीं चलता, उसे डॉक्टर की क्लिनिकल जांच के साथ जोड़कर देखना जरूरी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए AIIMS के डायरेक्टर, इमरजेंसी मेडिसिन के इंचार्ज डॉ. अक्षय, सफदरजंग अस्पताल के Treating Doctor और परिवार के डॉक्टर को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने को कहा है। यह सुनवाई अब मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को जारी रहेगी।
सुनवाई के दौरान डॉ. अंगमो के वकील अखिल सिबल ने दलील दी कि सोनम वांगचुक को बिना किसी सूचना या मेडिकल इमरजेंसी के विरोध स्थल से जबरन उठाया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना गिरफ्तारी के अस्पताल में रखना उनकी व्यक्तिगत आजादी और शरीर की स्वायत्तता के अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी उनकी जान बचाना है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनकी सेहत का ख्याल रखना जरूरी है।
इससे पहले रविवार को एक सिंगल जज बेंच ने उन्हें प्राइवेट अस्पताल भेजने से इनकार कर दिया था। डॉक्टरों ने बताया था कि 17-18 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक का पोटेशियम लेवल खतरनाक रूप से कम हो गया था। हालांकि उन्हें सहमति से दवाइयां दी गईं, लेकिन उन्होंने IV फ्लूइड लेने से मना कर दिया था। कोर्ट ने दोहराया कि हर नागरिक का जीवन कीमती है और सरकार का यह कर्तव्य है कि वह सोनम वांगचुक की सेहत का पूरा ख्याल रखे।