Delhi High Court का बड़ा फैसला, फुटपाथ पर सोने वाले बेघर लोग हादसे के जिम्मेदार नहीं
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि फुटपाथ पर सोने वाले बेघर लोगों को सड़क हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे लोगों के पास रहने के लिए कोई और जगह नहीं होती, इसलि
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि फुटपाथ पर सोने वाले बेघर लोगों को सड़क हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे लोगों के पास रहने के लिए कोई और जगह नहीं होती, इसलिए उन्हें लापरवाही का दोषी मानकर मुआवजे में कटौती करना गलत है।
यह मामला 2015 का है जब मदीपुर मेट्रो स्टेशन के पास एक ट्रक हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे। पहले मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने माना था कि फुटपाथ पर सोने वाले पीड़ितों की भी 50% गलती थी। लेकिन जस्टिस अनीश दयाल ने इस फैसले को पलट दिया और पूरी जिम्मेदारी ट्रक ड्राइवर पर डाली।
कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए होते हैं और कई मजदूर या रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोग मजबूरी में यहीं सोते हैं। ड्राइवर की यह जिम्मेदारी है कि वह पैदल चलने वालों वाले इलाके में ज्यादा सावधानी बरते। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि ट्रक ड्राइवर को फुटपाथ पर गाड़ी चलाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
इस फैसले के बाद कोर्ट ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ा दी है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया गया है कि वह ब्याज समेत संशोधित राशि छह हफ्ते के भीतर जमा करे। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस एक्ट, 1978 का हवाला देते हुए बताया कि फुटपाथ या ब्रिज भी ‘सड़क’ की परिभाषा के दायरे में आते हैं।