Delhi High Court का फैसला, महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने के आरोपी DCP को जांच से हटाने से इनकार
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें एडिशनल डीसीपी (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा को एक कोर्ट द्वारा निर्देशित पुलिस जांच की निगरानी से हटाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक प्र
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें एडिशनल डीसीपी (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा को एक कोर्ट द्वारा निर्देशित पुलिस जांच की निगरानी से हटाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक प्रदर्शन के दौरान महिला को थप्पड़ मारने की वजह से अधिकारी के मन में पक्षपात हो सकता है, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
यह पूरा मामला 20 जुलाई 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ज़रनिगार फातिमा ने दलील दी थी कि डीसीपी संदीप लांबा ने प्रदर्शन के दौरान एक महिला को थप्पड़ मारा था, जिससे यह डर है कि वह जांच निष्पक्ष नहीं करेंगे। यह याचिका मार्च 2025 में हुई एक कथित अवैध हिरासत की जांच से जुड़ी थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी को पक्षपाती नहीं माना जा सकता और कानूनी प्रक्रिया के बिना दोष तय करना सही नहीं होगा। कोर्ट ने साफ किया कि अगर अधिकारी ने कुछ गलत किया है तो वह कानून के मुताबिक सजा पाएंगे, लेकिन इस आधार पर उन्हें उनके सभी कामों से हटाना ठीक नहीं है। जस्टिस कथपालिया ने यह भी कहा कि विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि संप्रभुता के केंद्र (seat of sovereignty) को नुकसान पहुंचाया जाए।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि संदीप लांबा की निगरानी में जो जांच चल रही थी, वह पहले ही पूरी हो चुकी है और उसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। इस वजह से अब इस याचिका का कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं बचा है। दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट एम सुफियान सिद्दीकी पेश हुए थे।