Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा न मिलने पर दिल्ली पुलिस और सरकारी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा में यह लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है और इससे न्यायपालिका की आ
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा न मिलने पर दिल्ली पुलिस और सरकारी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा में यह लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है और इससे न्यायपालिका की आजादी खतरे में पड़ती है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये को असंवेदनशील बताया और सुरक्षा इंतजामों में देरी पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सरकार से क्या सवाल किए?
जस्टिस मनोज जैन ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब जोखिम साफ दिख रहा है, तो सुरक्षा देने में इतनी देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने माना कि जजों के लिए चौबीसों घंटे सुरक्षा की मांग सही है। कोर्ट ने पिछली मीटिंग के मिनट्स को स्वीकार करने से मना कर दिया और आदेश दिया कि सात दिनों के भीतर एक नई मीटिंग की जाए। इस मीटिंग में सुरक्षा के लिए ठोस और काम करने लायक सुझाव पेश करने होंगे।
जजों की सुरक्षा क्यों है जरूरी और क्या हैं खतरे?
कोर्ट में दलील दी गई कि जिला अदालतों के जजों पर केसों का बहुत ज्यादा बोझ होता है, जिससे उनके लिए खतरा बढ़ जाता है। न्यायिक सेवा एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट कीर्ति उप्पल ने बताया कि कई राज्यों ने जजों को सुरक्षा दी है, लेकिन दिल्ली में अभी तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने एक महिला जज का उदाहरण दिया जिन्हें उनकी सुरक्षा के लिए चुप रहने की धमकी दी गई थी।
सुरक्षा को लेकर अब तक क्या-क्या हुआ है?
- 21 अप्रैल 2026: हाईकोर्ट ने सुरक्षा में कमी पर नाराजगी जताई और 12 मई को अगली सुनवाई तय की।
- 16 अप्रैल 2026: सुप्रीम कोर्ट ने एक न्यायिक अधिकारी को धमकी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस को तुरंत सुरक्षा देने और खतरे का आकलन करने का आदेश दिया।
- 2-3 अप्रैल 2026: हाईकोर्ट की तीन जजों की बेंच ने जिला अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने को कहा था।
- 23-24 मार्च 2026: गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार और पुलिस को सुरक्षा रिव्यू के लिए मीटिंग करने का निर्देश दिया गया था।