Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल न्यूज पोर्टल NewsClick और उसके फाउंडर-एडिटर Prabir Purkayastha के खिलाफ दर्ज FIR और ED की कार्यवाही को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने माना कि विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े आरोपों में धोखाधड़ी य
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल न्यूज पोर्टल NewsClick और उसके फाउंडर-एडिटर Prabir Purkayastha के खिलाफ दर्ज FIR और ED की कार्यवाही को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने माना कि विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े आरोपों में धोखाधड़ी या साजिश का कोई सबूत नहीं मिला। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने इस पूरे मामले को कानून का गलत इस्तेमाल बताया है।
NewsClick पर क्या थे आरोप और कोर्ट ने क्या कहा?
NewsClick पर आरोप था कि उसने विदेशी निवेश के नियमों का उल्लंघन किया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अगस्त 2020 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय की शिकायत पर FIR दर्ज की थी। कोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2018 में जब US की कंपनी Worldwide Media Holdings LLC ने निवेश किया था, तब डिजिटल न्यूज मीडिया में FDI की कोई सीमा (Cap) नहीं थी। कोर्ट ने साफ किया कि शेयरों की वैल्यूएशन भी FEMA नियमों के हिसाब से सही तरीके से की गई थी।
ED की कार्रवाई पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तौर-तरीकों की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि करीब डेढ़ साल की जांच के बाद भी ED कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। इस कार्रवाई को स्वतंत्र पत्रकारिता पर एक मनमाना हमला और शक्तियों का दुरुपयोग बताया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब मुख्य FIR ही रद्द हो गई है, तो ED द्वारा दर्ज ECIR भी अपने आप खत्म हो जाएगी।
| मुख्य विवरण |
जानकारी |
| कोर्ट का फैसला |
FIR और ECIR रद्द |
| निवेश राशि |
लगभग ₹9.59 करोड़ (4.5 मिलियन USD) |
| निवेशक कंपनी |
Worldwide Media Holdings LLC (USA) |
| जांच एजेंसियां |
EOW और ED |
| मुख्य आधार |
2018 में FDI कैप का न होना |
Frequently Asked Questions (FAQs)
NewsClick के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई थी?
NewsClick पर आरोप था कि उसने विदेशी निवेश (FDI) के नियमों का उल्लंघन किया है और धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के जरिए फंड जुटाया है।
कोर्ट ने ED की कार्रवाई को गलत क्यों माना?
कोर्ट ने कहा कि ED बिना किसी ठोस सबूत के ‘फिशिंग’ (अंधाधुंध खोज) कर रहा था और यह कार्रवाई स्वतंत्र पत्रकारिता पर एक मनमाना हमला थी।