Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने DDA द्वारा एक ठेकेदार को सिर्फ ईमेल भेजकर टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के फैसले को गलत बताया और इसे रद्द कर दिया। जस्टिस जसमीत सिं
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने DDA द्वारा एक ठेकेदार को सिर्फ ईमेल भेजकर टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के फैसले को गलत बताया और इसे रद्द कर दिया। जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि बिना सुनवाई के किसी को अयोग्य ठहराना प्राकृतिक न्याय के नियमों के खिलाफ है।
DDA ने ठेकेदार को क्यों किया था बाहर?
यह पूरा मामला M/s Tekram Enterprises से जुड़ा है, जो स्विमिंग पूल के रखरखाव का काम करती है। DDA ने 25 मार्च 2026 को एक ईमेल भेजकर इस फर्म को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। DDA का कहना था कि इस फर्म की मालकिन अर्पना तिवारी पहले DDA के एक स्पोर्ट्स सेंटर में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी रह चुकी हैं, इसलिए उन्हें अयोग्य माना गया।
कोर्ट ने DDA के फैसले को गलत क्यों माना?
जस्टिस जसमीत सिंह ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि किसी भी व्यक्ति या कंपनी को ब्लैकलिस्ट या अयोग्य घोषित करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका देना जरूरी है। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) का उल्लंघन बताया। कोर्ट के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- बिना किसी कारण बताओ नोटिस (Show-cause notice) के ईमेल से बाहर करना गलत है।
- ठेकेदार को अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं दिया गया।
- ऐसा फैसला मनमाना और तर्कहीन है।
- सुप्रीम कोर्ट के UMC Technologies मामले के फैसले का हवाला देते हुए उचित अवसर देने की बात कही गई।
अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को अपना फैसला सुनाया और DDA के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें ठेकेदार को सभी टेंडरों से बाहर किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि Tekram Enterprises विहार स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के टेंडर में हिस्सा नहीं ले पाएगी। इस मामले में ठेकेदार की तरफ से वकील दीपक मेहरा, विकास कुमार और विक्षित कुमार ने पैरवी की, जबकि DDA की तरफ से कृतिका गुप्ता मौजूद थीं।