Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टिविस्ट्स को अवैध रूप से हिरासत में लेने और उनके साथ मारपीट करने के आरोपों को लेकर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि भले ही पुलिस किसी आतंकी एंगल की जांच कर रही हो, लेक
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टिविस्ट्स को अवैध रूप से हिरासत में लेने और उनके साथ मारपीट करने के आरोपों को लेकर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि भले ही पुलिस किसी आतंकी एंगल की जांच कर रही हो, लेकिन किसी को भी हिरासत में लेते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। यह पूरा मामला मार्च 2026 में हुई कथित प्रताड़ना से जुड़ा है।
कोर्ट ने पुलिस से क्या कहा और क्या निर्देश दिए
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर dudeja की बेंच ने दिल्ली पुलिस द्वारा सौंपी गई सीलबंद रिपोर्ट पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर सही कार्रवाई नहीं हुई तो इस मामले की जांच CBI को सौंप दी जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पेशल सेल के ऑफिस के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है और पूरी केस फाइल जमा करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को दोपहर 2:30 बजे होगी।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल का क्या है दावा
दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में अवैध हिरासत या प्रताड़ना के सभी आरोपों को नकारा है। पुलिस का कहना है कि जुलाई 2025 में दर्ज एक FIR के सिलसिले में एक्टिविस्ट्स को सिर्फ कानूनी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस के मुताबिक, यह मामला एक महिला के गायब होने से जुड़ा है जिसे कथित तौर पर माओवादी विचारधारा वाले लोगों ने ब्रेनवाश किया था। पुलिस ने इन एक्टिविस्ट्स को ‘भगत सिंह छात्र एकता मंच’ (BSCEM) से जुड़ा बताकर उन्हें राष्ट्रविरोधी और नक्सली कंटेंट फैलाने वाला बताया है।
केस से जुड़ी मुख्य जानकारियां
| विवरण |
जानकारी |
| घटना का समय |
मार्च 2026 |
| FIR की तारीख |
जुलाई 2025 |
| अगली सुनवाई |
19 मई 2026 (दोपहर 2:30 बजे) |
| संबंधित संगठन |
भगत सिंह छात्र एकता मंच (BSCEM) |
| मुख्य नाम |
लक्षिता रjoura और रुद्र विक्रम |
| जांच एजेंसी |
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल |