Delhi: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाते हुए उद्यमी और boAt कंपनी के सह-संस्थापक अमन गुप्ता के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कोई भी तीसरा पक्ष उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्व
Delhi: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाते हुए उद्यमी और boAt कंपनी के सह-संस्थापक अमन गुप्ता के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कोई भी तीसरा पक्ष उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल नहीं कर सकता। यह आदेश उन लोगों के लिए चेतावनी है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत तरीके से किसी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं।
अदालत ने किन चीजों के इस्तेमाल पर लगाई रोक
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने 7 मई 2026 को यह अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने 44 से ज्यादा प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे अमन गुप्ता की छवि, आवाज और व्यक्तित्व का व्यावसायिक शोषण न करें। इसमें AI के जरिए बनाए गए डीपफेक वीडियो, अश्लील सामग्री और गलत तरीके से बनाए गए प्रतिरूपण शामिल हैं। इसके अलावा फर्जी स्पीकर बुकिंग वेबसाइट और टेलीग्राम बॉट के जरिए लोगों को गुमराह करने पर भी रोक लगाई गई है।
Google और Meta को क्या निर्देश दिए गए
अदालत ने केवल निजी लोगों को ही नहीं, बल्कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी जिम्मेदारी सौंपी है। Google LLC और Meta को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी सभी सामग्री को हटाएं जो अमन गुप्ता के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। साथ ही, कोर्ट ने इन कंपनियों से उन खातों के विवरण मांगे हैं जो इस तरह के फर्जी काम में शामिल थे। यह कदम डिजिटल दुनिया में धोखाधड़ी और फर्जी ब्रांड एंडोर्समेंट को रोकने के लिए उठाया गया है।
आम लोगों और उद्यमियों के लिए क्यों है यह जरूरी
भारत में अब तक ज्यादातर फिल्म सितारों और खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा होती थी, लेकिन पहली बार किसी डिजिटल युग के उद्यमी को यह सुरक्षा मिली है। यह फैसला उन लोगों के लिए मिसाल है जिनकी पहचान सोशल मीडिया और टीवी के जरिए बनी है। अब किसी भी व्यक्ति की डिजिटल पहचान को उसकी बौद्धिक संपदा माना जाएगा, जिससे भविष्य में AI और डीपफेक के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अदालत ने अमन गुप्ता के मामले में क्या आदेश दिया है?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था अमन गुप्ता की अनुमति के बिना उनके नाम, फोटो, आवाज और व्यक्तित्व का इस्तेमाल नहीं करेगी। यह रोक AI-जनरेटेड सामग्री और फर्जी विज्ञापनों पर भी लागू है।
इस फैसले का असर किन कंपनियों पर पड़ेगा?
इस फैसले का सीधा असर Google और Meta जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा, जिन्हें उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने और दोषी खातों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।