Delhi High Court की बड़ी टिप्पणी, कहा- प्रेस की आजादी के साथ जवाबदेही भी जरूरी, डिजिटल रिपोर्टिंग पर जताई चिंता
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रेस की आजादी और पत्रकारों की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने 16 जुलाई को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि प्रेस की आजादी बहुत जरूरी है, लेकिन इसका इस्
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रेस की आजादी और पत्रकारों की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने 16 जुलाई को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि प्रेस की आजादी बहुत जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता या जनता की शांति भंग करने के लिए ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता।
यह मामला एक यूट्यूब चैनल के लिए काम करने वाले दो फ्रीलांस रिपोर्टर्स के साथ मारपीट से जुड़ा था। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी आबिद अली और फुरकान को नियमित जमानत दे दी है। ये दोनों आरोपी 5 जुलाई 2025 से जेल में थे। घटना 4 जुलाई 2025 को दिल्ली के सीमापुरी इलाके की एक अनधिकृत कॉलोनी में हुई थी, जहां रिपोर्टर्स वीडियो बना रहे थे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस कथपालिया ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के समय में कोई भी व्यक्ति हाथ में मोबाइल और माइक लेकर खुद को रिपोर्टर बता देता है, जबकि उनके पास पत्रकारिता की कोई ट्रेनिंग या नैतिक समझ नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि ऐसे ‘सेल्फ-स्टाइल रिपोर्टर्स’ अक्सर आक्रामक सवाल पूछते हैं और सनसनीखेज खबरें फैलाते हैं, जिससे समाज में बंटवारा या अशांति पैदा हो सकती है।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि सरकार और विधायिका को एक ऐसा नियम या फ्रेमवर्क बनाना चाहिए जिससे प्रेस की आजादी और पेशेवर जवाबदेही के बीच संतुलन बना रहे। साथ ही, कोर्ट ने सीमापुरी पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए और कहा कि आरोपियों की पहचान करने में पुलिस ने लापरवाही बरती और जांच में कई कमियां रहीं।