Delhi के सरकारी स्कूलों में चुनाव ड्यूटी पर बवाल, हाईकोर्ट में याचिका दायर; शिक्षकों की तैनाती पर कैप लगाने की मांग

Delhi: दिल्ली के सरकारी और नगर निगम स्कूलों के शिक्षकों को BLO और SIR ड्यूटी पर लगाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में मांग की ग

Delhi: दिल्ली के सरकारी और नगर निगम स्कूलों के शिक्षकों को BLO और SIR ड्यूटी पर लगाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती की एक सीमा तय हो ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

एडवोकेट राजेश कुमार गोगना और अशोक अग्रवाल ने 22 जुलाई 2026 को यह याचिका दाखिल की। इसमें कहा गया है कि किसी भी स्कूल के 10 प्रतिशत से ज्यादा नियमित शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर न लगाया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि स्कूल के समय के दौरान शिक्षकों को इस काम में न लगाया जाए, क्योंकि इससे क्लासरूम में पढ़ाई बाधित होती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को पहले नॉन-टीचिंग स्टाफ का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसा कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 की धारा 159 में प्रावधान है।

इस मामले में कानूनी दलीलें दी गई हैं कि बड़े पैमाने पर शिक्षकों की तैनाती संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21A का उल्लंघन है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 2008 के एक फैसले का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव का काम आमतौर पर छुट्टियों या गैर-शिक्षण दिनों में होना चाहिए। इसके अलावा, इसे बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का भी उल्लंघन बताया गया है।

शिक्षकों के संगठनों में भी इसे लेकर काफी नाराजगी है। गवर्नमेंट स्कूल्स टीचर्स एसोसिएशन (GSTA) ने 7 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखकर बताया कि हजारों शिक्षकों के ड्यूटी पर जाने से लाखों छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। दिल्ली के वाइस एंड प्रिंसिपल्स एसोसिएशन ने भी चिंता जताई कि लंबे समय तक शिक्षकों की अनुपस्थिति से स्कूलों का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ है। अनुमान है कि करीब 8,000 सरकारी शिक्षक इन ड्यूटीज में लगे हुए हैं। दिल्ली कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि इससे खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग (ECI) ने अगस्त 2025 में हाईकोर्ट को बताया था कि BLO नियुक्त करने के लिए शिक्षकों की तैनाती पर कोई पाबंदी नहीं है। आयोग ने जून 2025 में अपने नियमों में बदलाव किया था, जिसके बाद राज्य या स्थानीय सरकार के किसी भी ग्रुप सी और उससे ऊपर के नियमित कर्मचारी को BLO बनाया जा सकता है।