Delhi में सरकारी शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी पर विवाद, High Court में PIL दाखिल

Delhi: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को चुनाव संबंधी कामों में लगाए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। कोर्ट में गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को इस मामले की सुनवाई होनी है। इस याचि

Delhi: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को चुनाव संबंधी कामों में लगाए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। कोर्ट में गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को इस मामले की सुनवाई होनी है। इस याचिका में मांग की गई है कि शिक्षकों को बीएलओ (BLO) और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) जैसी चुनावी ड्यूटी से हटाया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

याचिका दायर करने वाले वकील राजेश कुमार गोना और अशोक अग्रवाल का कहना है कि शिक्षकों को इस तरह ड्यूटी पर लगाने से क्लास की पढ़ाई रुक जाती है और लाखों छात्रों का नुकसान होता है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह कदम राइट टू एजुकेशन एक्ट (RTE Act), 2009 की धारा 27 का उल्लंघन है, जो शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से मना करता है। साथ ही इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21A के खिलाफ भी बताया गया है।

इस मामले में 2008 के सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव का काम आमतौर पर छुट्टियों या गैर-शिक्षण दिनों में होना चाहिए। याचिका में यह भी बताया गया है कि 14 जुलाई 2026 के एक आदेश के जरिए अंबेडकर नगर विधानसभा क्षेत्र के करीब 15 सरकारी स्कूलों से 149 शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी पर लगाया गया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यह भी कहा गया कि दो स्कूलों के सभी रेगुलर शिक्षकों को एसआईआर (SIR) काम में लगा दिया गया।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग (ECI) का कहना है कि जून 2025 में गाइडलाइन्स में बदलाव के बाद अब ग्रुप सी और उससे ऊपर के किसी भी सरकारी कर्मचारी को बीएलओ बनाया जा सकता है। आयोग के मुताबिक, शिक्षकों को तब तैनात किया जा सकता है जब वे छुट्टियों या स्कूल के समय के बाद काम करें। हालांकि, गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन और प्रिंसिपल्स एसोसिएशन ने इस बात पर चिंता जताई है कि इससे स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बिगड़ रहा है।