Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पेंशन तय करने के नियमों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि किसी भी रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन उसके पद या रैंक के आधार पर नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाली आखिरी सै
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पेंशन तय करने के नियमों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि किसी भी रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन उसके पद या रैंक के आधार पर नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाली आखिरी सैलरी (last pay drawn) के आधार पर तय की जाएगी। यह फैसला CRPF के एक रिटायर्ड जवान की याचिका पर आया है।
क्या था पूरा मामला और याचिकाकर्ता की मांग
यह मामला CRPF के एक रिटायर्ड कर्मी से जुड़ा है, जो जुलाई 1997 में तीन दशक से ज्यादा की सेवा के बाद रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के समय वह Inspector/Radio Operator के पद पर थे। उन्होंने मांग की थी कि उनकी पेंशन को एक हायर पे बैंड में दोबारा तय किया जाए, क्योंकि उनका तर्क था कि इंस्पेक्टर की रैंक एक ऊंचे पे स्केल के बराबर होती है। उन्होंने Assured Career Progression Scheme (ACPS) के तहत भी लाभ मांगा था।
कोर्ट ने अपना फैसला क्यों सुनाया
केंद्र सरकार और CRPF अधिकारियों ने कोर्ट में दलील दी कि पेंशन के नियम पूरी तरह से उस सैलरी पर आधारित होते हैं जो कर्मचारी ने रिटायरमेंट के समय वास्तव में प्राप्त की थी। कोर्ट ने इन दलीलों को सही माना और 2018 में Central Civil Pension Revisional Authority द्वारा दिए गए आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल पद या रैंक के आधार पर पेंशन नहीं बढ़ाई जा सकती, बल्कि वास्तविक पे स्केल ही मान्य होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पेंशन तय करने का मुख्य आधार क्या होता है?
दिल्ली हाई कोर्ट के अनुसार, पेंशन का निर्धारण कर्मचारी द्वारा रिटायरमेंट के समय प्राप्त की गई आखिरी सैलरी और वास्तविक पे स्केल के आधार पर किया जाता है, न कि केवल पद या रैंक के आधार पर।
यह फैसला किस विभाग के कर्मचारी से संबंधित था?
यह मामला सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर/रेडियो ऑपरेटर की याचिका से संबंधित था, जिन्होंने अपनी पेंशन को हायर पे बैंड में दोबारा तय करने की मांग की थी।