Delhi हाईकोर्ट का आदेश: जजों और कानून मंत्री के लंदन बैडमिंटन कार्यक्रम में जाने की फर्जी खबर हटाई जाए
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सख्त निर्देश दिया है कि इंटरनेट पर चल रही उन फर्जी खबरों को तुरंत हटाया जाए, जिनमें देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI), सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के जजों और केंद्रीय कानून मंत्रियों क
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सख्त निर्देश दिया है कि इंटरनेट पर चल रही उन फर्जी खबरों को तुरंत हटाया जाए, जिनमें देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI), सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के जजों और केंद्रीय कानून मंत्रियों के लंदन में बैडमिंटन चैंपियनशिप में शामिल होने का दावा किया गया था। जस्टिस तेजस करिया ने 20 जून, 2026 को यह आदेश भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) की एक याचिका पर सुनाया।
अदालत ने इस पूरी सामग्री को न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के लिए झूठा, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक बताया। जस्टिस करिया ने कहा कि इस तरह की भ्रामक जानकारी फैलाने का मकसद न्यायपालिका की इज्जत को नुकसान पहुंचाना है। कोर्ट ने माना कि जब संवैधानिक अदालतों के खिलाफ ऐसी झूठी खबरें फैलती हैं, तो न्याय प्रणाली में आम जनता का भरोसा कम हो सकता है, जिसकी भरपाई करना मुश्किल होता है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत जरूरी नोटिफिकेशन जारी करे ताकि उन लोगों की पहचान हो सके जिन्होंने यह खबर फैलाई। साथ ही, सभी सोशल मीडिया कंपनियों, सर्च इंजन और वेब-होस्टिंग प्लेटफॉर्म को आदेश दिया गया है कि वे इस सामग्री को हटा दें और इसे आगे शेयर होने से रोकें। सोशल मीडिया कंपनियों को उन लोगों के डिजिटल फुटप्रिंट, आईपी लॉग और बैंकिंग रिकॉर्ड जैसे जरूरी डेटा को सुरक्षित रखने और कोर्ट को सौंपने को कहा गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय अब इस पूरे मामले की जांच करेगा।
इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की तरफ से दलील दी और इन दावों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया। दरअसल, फर्जी खबरों में दावा किया गया था कि 7 जून, 2026 को ये दिग्गज लंदन में बैडमिंटन खेल रहे थे। जबकि सच यह था कि वायरल तस्वीरें 29 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में हुए एक नेशनल बार और बेंच बैडमिंटन टूर्नामेंट की थीं। पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट ने भी पहले ही इन दावों को गलत बताया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अधिसूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर ऐसी सभी मिलती-जुलती खबरों को इंटरनेट से हटा दिया जाए।