Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में बंद दोषियों के जीवन को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने दिल्ली सरकार को ‘खुली जेल’ (Open Correctional Institutions) बनाने के लिए एक ठोस योजना और मसौदा तैयार करने
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में बंद दोषियों के जीवन को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने दिल्ली सरकार को ‘खुली जेल’ (Open Correctional Institutions) बनाने के लिए एक ठोस योजना और मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका मकसद कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
खुली जेल क्या है और इससे कैदियों को क्या फायदा होगा?
खुली या अर्ध-खुली जेलों का मुख्य उद्देश्य दोषियों को सुधारने का मौका देना है। इसमें पात्र कैदियों को दिन के समय जेल परिसर से बाहर जाकर काम करने और अपनी आजीविका कमाने की अनुमति मिलेगी। शाम को उन्हें वापस जेल लौटना होगा। इससे कैदियों का मनोवैज्ञानिक तनाव कम होगा और वे बाहर की दुनिया से जुड़ सकेंगे। हाईकोर्ट ने कहा है कि कैदियों का सामाजिक पुनर्वास केवल एक इच्छा नहीं, बल्कि एक संवैधानिक जरूरत है।
अदालत ने सरकार को क्या निर्देश दिए हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार को दो महीने के भीतर इस योजना का मसौदा तैयार करने को कहा है। साथ ही, सरकार को उन कैदियों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है जिन्हें पारंपरिक जेल से निकालकर खुली जेल में भेजा जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी।
निगरानी समिति का गठन और उसकी जिम्मेदारी
खुली जेलों के प्रबंधन के लिए एक निगरानी समिति बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) के कार्यकारी अध्यक्ष करेंगे। इस समिति में गृह सचिव और एक वरिष्ठ जेल अधिकारी भी शामिल होंगे। समिति के मुख्य काम नीचे दिए गए हैं:
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सही तरीके से पालन करना।
- खुली जेलों के विस्तार और उनके इस्तेमाल की देखरेख करना।
- पात्र कैदियों को समय पर खुली जेल में भेजने की सुविधा देना।
- कामकाज के दौरान आने वाली कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना।
इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होगी और दिल्ली सरकार को अब तक उठाए गए कदमों का हलफनामा कोर्ट में दाखिल करना होगा।