Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेलों में बंद उन विचाराधीन कैदियों के लिए बड़ी राहत दी है जिन्होंने अपनी संभावित सजा का एक बड़ा हिस्सा पहले ही काट लिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ऐसे कैदियों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। यह आ
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेलों में बंद उन विचाराधीन कैदियों के लिए बड़ी राहत दी है जिन्होंने अपनी संभावित सजा का एक बड़ा हिस्सा पहले ही काट लिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ऐसे कैदियों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के नियमों को सख्ती से लागू करने के मकसद से दिया गया है ताकि लोगों को समय पर कानूनी मदद मिल सके।
किन कैदियों को मिलेगी रिहाई और क्या है नियम
न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने एक धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह निर्देश जारी किए। कोर्ट के मुताबिक, जिन विचाराधीन कैदियों ने अपनी संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई (1/3) या आधा हिस्सा जेल में बिता लिया है, उन्हें रिहा किया जाए। अदालत ने जिला न्यायाधीशों और जेल अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे इन नियमों का पूरी तरह पालन करें।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश और BNSS का प्रावधान
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी अगस्त 2024 में रिहाई की प्रक्रिया को तेज करने को कहा था। नए नियमों के तहत अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 479 लागू होगी। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- अगर कोई विचाराधीन कैदी अधिकतम सजा का एक तिहाई समय काट चुका है, तो उसे जमानत दी जाएगी।
- यह नियम 1 जुलाई 2024 से पहले के पुराने मामलों पर भी लागू होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधीक्षकों को तीन महीने के भीतर इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया था।