Delhi के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों की मशीनें पड़ी हैं बेकार, High Court ने दिए ऑडिट के आदेश

Delhi: सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की महंगी मेडिकल मशीनें सालों से धूल फांक रही हैं। इस लापरवाही पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में मशीनों का ऑडिट करा

Delhi: सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की महंगी मेडिकल मशीनें सालों से धूल फांक रही हैं। इस लापरवाही पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में मशीनों का ऑडिट कराया जाए ताकि यह पता चल सके कि जनता के टैक्स के पैसे से खरीदे गए उपकरणों का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब LNJP Hospital में एक 70 साल के मरीज को ICU बेड नहीं मिला, जबकि ऑनलाइन पोर्टल पर बेड खाली दिख रहा था। इसके अलावा इमरजेंसी हेल्पलाइन पर या तो कोई जवाब नहीं दे रहा था या सिक्योरिटी गार्ड फोन उठा रहे थे। इस घटना के बाद जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत पीएस अरोरा की बेंच ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसे सरकारी संसाधनों की बड़ी बर्बादी करार दिया।

अदालत ने पाया कि दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में 2017 में 15.42 करोड़ रुपये की PET Cyclotron मशीन खरीदी गई थी, जो अप्रैल 2022 से बंद पड़ी है। वजह यह बताई गई कि इसे चलाने के लिए ट्रेंड स्टाफ नहीं है और मंजूरी पेंडिंग है। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। अब सभी मेडिकल सुपरिटेंडेंट को हलफनामा देना होगा कि कौन सी मशीन क्यों बेकार पड़ी है, उसकी कीमत क्या थी और उसे कब खरीदा गया था।

निर्देश/कार्य विवरण
NIC ऑडिट 38 सरकारी अस्पतालों में ICU बेड और HMIS सिस्टम का सरप्राइज ऑडिट 31 जुलाई 2026 तक चलेगा।
हेल्पलाइन इमरजेंसी और ICU बेड की जानकारी के लिए 10 से 20 लाइनों वाला टोल-फ्री नंबर शुरू करना होगा।
नोडल ऑफिसर मरीजों के रेफरल के लिए नोडल ऑफिसर तैनात होंगे ताकि कोई मरीज बीच में न फंसे।
रिपोर्टिंग अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को होगी, उससे 5 दिन पहले सभी रिपोर्ट जमा करनी होंगी।
डेमो दिल्ली सरकार को ICU Beds Saarthi और e-HMIS प्लेटफॉर्म का लाइव डेमो कोर्ट को देना होगा।

अदालत ने साफ कहा है कि डिजिटल डेटा और जमीन पर मौजूद हकीकत में बहुत अंतर है, जिसे ठीक करना जरूरी है। अब NIC की टीम अस्पतालों में जाकर चेक करेगी कि ऑनलाइन दिखने वाले बेड वास्तव में उपलब्ध हैं या नहीं।