Delhi High Court का OpenAI को बड़ा दिलासा, ChatGPT की ट्रेनिंग के लिए कॉपीराइट कंटेंट के इस्तेमाल को माना सही
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में OpenAI को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि ChatGPT जैसे AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए कॉपीराइट मटेरियल का इस्तेमाल करना कानूनन गलत नहीं है। शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को आए इस फैसल
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में OpenAI को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि ChatGPT जैसे AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए कॉपीराइट मटेरियल का इस्तेमाल करना कानूनन गलत नहीं है। शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को आए इस फैसले में कोर्ट ने कॉपीराइट उल्लंघन के आरोपों को खारिज कर दिया।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब नवंबर 2024 में समाचार एजेंसी ANI ने OpenAI के खिलाफ केस किया था। ANI का आरोप था कि OpenAI ने बिना अनुमति के उनकी खबरों का इस्तेमाल ChatGPT को सिखाने के लिए किया। ANI ने यह भी दावा किया कि AI द्वारा दी गई कुछ गलत जानकारियों की वजह से उनकी साख को नुकसान पहुँचा है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में ANI ने OpenAI को लाइसेंस देने की पेशकश की थी, लेकिन कंपनी ने इसे मना कर दिया था।
जस्टिस अमित बंसल ने अपने फैसले में साफ किया कि OpenAI ने कॉपीराइट एक्ट की धारा 52(1)(a) के तहत ‘फेयर डीलिंग’ का पालन किया है। कोर्ट ने माना कि AI द्वारा स्टोर किया गया डेटा कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं करता है। साथ ही यह भी कहा गया कि ChatGPT के जवाब ANI की मूल खबरों से इतने मिलते-जुलते नहीं हैं कि उन्हें कॉपी माना जाए। जस्टिस बंसल ने यह भी कहा कि अगर OpenAI पर रोक लगाई जाती है, तो इससे न केवल कंपनी को बल्कि उन आम लोगों को भी नुकसान होगा जो AI सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
इस केस में ANI के अलावा फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन और इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री जैसे संगठन भी शामिल हुए थे। कोर्ट की मदद के लिए एडवोकेट आदर्श रमनुजन और NLSIU के प्रोफेसर डॉ. अरुल जॉर्ज स्केरिया को नियुक्त किया गया था। डॉ. स्केरिया ने दलील दी थी कि OpenAI द्वारा कंटेंट का इस्तेमाल ‘नॉन-एक्सप्रेसिव’ है, इसलिए यह कॉपीराइट कानून के दायरे में नहीं आता। OpenAI ने शुरुआत में दिल्ली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए थे, लेकिन कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई का अपना अधिकार बरकरार रखा।