Delhi High Court ने डिजिटल पत्रकारिता पर जताई चिंता, कहा- मोबाइल और माइक लेकर कोई भी बन रहा रिपोर्टर

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर रिपोर्टिंग करने वालों को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि आजकल मोबाइल और माइक्रोफोन हाथ में लेकर लगभग हर व्यक्ति खुद को रिपोर्टर बताने लगा है। जस्टिस

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर रिपोर्टिंग करने वालों को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि आजकल मोबाइल और माइक्रोफोन हाथ में लेकर लगभग हर व्यक्ति खुद को रिपोर्टर बताने लगा है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने इस बात पर चिंता जताई कि बिना किसी ट्रेनिंग और नैतिकता के लोग पत्रकारिता कर रहे हैं।

यह मामला 17 जुलाई 2026 को एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। यह केस जुलाई 2025 में दिल्ली के सीमापुरी इलाके में हुई एक घटना से जुड़ा है, जहां एक कथित अवैध धार्मिक स्थल की रिपोर्टिंग कर रहे दो फ्रीलांस YouTube रिपोर्टर्स के साथ मारपीट हुई थी। इस मामले में कोर्ट ने आरोपी आबिद अली और फुक्रान को जमानत दे दी, लेकिन साथ ही डिजिटल पत्रकारिता के गिरते स्तर पर अपनी राय रखी।

जस्टिस कथपालिया ने कहा कि कुछ तथाकथित रिपोर्टर आक्रामक तरीके से सवाल पूछते हैं और भ्रामक खबरें फैलाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना जांच-परख के सनसनीखेज खबरें चलाने से समाज में बंटवारा बढ़ सकता है और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है। कोर्ट ने माना कि मीडिया के पास जनमत बनाने की बड़ी ताकत होती है, इसलिए उन्हें निष्पक्षता और जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।

प्रेस की आजादी को लोकतंत्र का आधार बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार और विधायिका से एक नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (नियम) बनाने को कहा है। कोर्ट के मुताबिक, ऐसा कानून होना चाहिए जो मीडिया की आजादी को भी बचाए और साथ ही पत्रकारों की पेशेवर जवाबदेही और नैतिक मानकों को भी तय करे। इससे आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होगी और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर लगाम लगेगी।