Delhi High Court की बड़ी टिप्पणी, कहा- सिर्फ मोबाइल रखने से कोई पत्रकार नहीं बनता, जिम्मेदारी जरूरी
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने आज के डिजिटल दौर में पत्रकारिता के गिरते स्तर पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ हाथ में मोबाइल फोन और माइक होने से कोई पत्रकार नहीं बन जाता। अदालत के मुताबिक, मीडिया के पास लोगों
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने आज के डिजिटल दौर में पत्रकारिता के गिरते स्तर पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ हाथ में मोबाइल फोन और माइक होने से कोई पत्रकार नहीं बन जाता। अदालत के मुताबिक, मीडिया के पास लोगों की सोच बदलने की बड़ी ताकत होती है, इसलिए उनके लिए निष्पक्ष रहना और जिम्मेदारी से काम करना बहुत जरूरी है।
यह मामला जस्टिस गिरीश कथपालिया की अदालत में एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आया। कोर्ट ने बताया कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से अब मीडिया का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी नियम या कंट्रोल के काम कर रहा है। ऐसे में कई ‘सेल्फ-स्टाइल’ रिपोर्टर बिना किसी ट्रेनिंग या नैतिकता के रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जिससे समाज में गलत बातें फैलती हैं और आपसी भाईचारा बिगड़ने का खतरा रहता है।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि प्रेस की आजादी लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल दूसरों को डराने, धमकाने या गलत खबरें फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता। जस्टिस कथपालिया ने कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार और कानून बनाने वालों को मीडिया के लिए एक सही ढांचा तैयार करना चाहिए। ऐसा सिस्टम होना चाहिए जिससे प्रेस की आजादी भी बनी रहे और रिपोर्टर्स की जवाबदेही भी तय हो सके।
यह पूरी चर्चा सीमापुरी इलाके में दो यूट्यूब रिपोर्टर्स पर हुए हमले के मामले में आबिद अली और फुकरान नाम के लोगों को जमानत देते समय हुई। कोर्ट ने माना कि बिना किसी जवाबदेही के की जाने वाली आक्रामक रिपोर्टिंग से सार्वजनिक व्यवस्था खराब हो सकती है।