Delhi High Court का बड़ा कदम, आर्टिफिशियल स्वीटनर के सेहत पर असर की जांच के लिए केंद्र और FSSAI से मांगा जवाब
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्टिफिशियल स्वीटनर (नकली चीनी) के सेहत पर होने वाले असर को लेकर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई की है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को नो
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्टिफिशियल स्वीटनर (नकली चीनी) के सेहत पर होने वाले असर को लेकर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई की है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह मामला हम सभी से जुड़ा है।
यह याचिका इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की तरफ से दायर की गई है। ISMA ने मांग की है कि भारत में आर्टिफिशियल स्वीटनर के लंबे समय तक इस्तेमाल से सेहत पर क्या असर पड़ता है, इसकी एक स्वतंत्र और भारत-विशिष्ट वैज्ञानिक जांच कराई जाए। याचिका में WHO और IARC जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिनमें इन स्वीटनर्स से कैंसर, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर और दिल की बीमारियों जैसे खतरों की बात कही गई है।
ISMA ने कोर्ट से यह भी अपील की है कि FSSAI को ऐसे निर्देश दिए जाएं ताकि ‘शुगर फ्री’, ‘जीरो शुगर’ या ‘डाइट’ के नाम पर बेचे जाने वाले उत्पादों में भ्रामक दावे न किए जाएं। याचिका में मांग की गई है कि पैकेट के सामने साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि इसमें आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल हुआ है। इसके अलावा, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों जैसे संवेदनशील लोगों के लिए जागरूकता अभियान चलाने और पब्लिक एडवाइजरी जारी करने की बात भी कही गई है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को दो हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। फिलहाल, कोर्ट ने लेबलिंग या किसी अन्य पाबंदी को लेकर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।