Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में आवेदन करने के लिए ली जाने वाली महंगी फीस के खिलाफ एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और NGT
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में आवेदन करने के लिए ली जाने वाली महंगी फीस के खिलाफ एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और NGT से जवाब मांगा है। यह कदम उन लोगों के लिए राहत भरा हो सकता है जो पर्यावरण की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं लेकिन भारी खर्च के कारण पीछे हट जाते हैं।
NGT में कितनी फीस देनी पड़ती है और क्या है विवाद
याचिकाकर्ता अजय दुबे ने NGT के 2011 के नियमों और 2019 के एक आदेश को चुनौती दी है। उनके मुताबिक, फीस इतनी ज्यादा है कि आम आदमी के लिए मामला दर्ज कराना मुश्किल हो गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार फीस का विवरण इस प्रकार है:
| नियम/आदेश |
फीस का विवरण |
| नियम 12(2) |
आवेदन या अपील के लिए 1000 रुपये |
| नियम 12(2A) |
अन्य आवेदनों के लिए न्यूनतम 500 रुपये |
| 2019 ऑफिस ऑर्डर |
हर 25 पन्नों पर 100 रुपये प्रिंटिंग चार्ज |
आम जनता पर क्या असर पड़ता है
याचिकाकर्ता ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक कोयला खनन प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरणीय मामले की शुरुआत में ही उन्हें करीब 8,200 रुपये देने पड़े। उनका कहना है कि जब NGT में ऑनलाइन फाइलिंग अनिवार्य हो गई है, तो कागजी प्रिंटिंग के नाम पर पैसे लेना गलत है। इस भारी खर्च की वजह से लोग जनहित में पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने के मामले उठाने से डरते हैं, जिससे सरकार की जिम्मेदारी भी कमजोर होती है।
कोर्ट की कार्यवाही और आगे क्या होगा
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने शुक्रवार, 17 अप्रैल, 2026 को नोटिस जारी कर संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। अब यह देखा जाएगा कि मंत्रालय और NGT इन शुल्कों को कम करने या हटाने पर क्या रुख अपनाते हैं।