Delhi: भारत में कैंसर के मरीजों के लिए बनाई गई जीवनरक्षक दवाओं को अवैध तरीके से विदेशों में भेजने का मामला सामने आया है। इस गंभीर मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं को नोटिस जारी कर जवाब
Delhi: भारत में कैंसर के मरीजों के लिए बनाई गई जीवनरक्षक दवाओं को अवैध तरीके से विदेशों में भेजने का मामला सामने आया है। इस गंभीर मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई है कि जो दवाएं सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए थीं, उन्हें गैर-कानूनी तरीके से बाहर भेजा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने क्या कहा?
बुधवार, 20 मई 2026 को न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार, CDSCO, DGFT, CBIC, DRI और DGGI को नोटिस भेजकर पूछा है कि इस अवैध निर्यात को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि दवाओं की खरीद और निर्यात की पूरी चेन की जांच के लिए एक SIT या स्वतंत्र एजेंसी बनाई जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
CDSCO के नियमों की अनदेखी का आरोप
इस जनहित याचिका में 19 जनवरी 2024 को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी एक ज्ञापन का हवाला दिया गया है। इस आदेश में साफ कहा गया था कि जिन फार्मा उत्पादों पर ‘केवल भारत में बिक्री के लिए’ लिखा है, उन्हें निर्यातक बाहर नहीं भेज सकते। कोर्ट ने CDSCO से विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इस सर्कुलर का पालन करवाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
मामले से जुड़ी मुख्य संस्थाएं
- न्यायालय: दिल्ली हाईकोर्ट (खंडपीठ)
- याचिकाकर्ता: रिपन वाधवा और रमेश कुमार शर्मा (अधिवक्ता ध्रुव चावला के माध्यम से)
- प्रतिवादी: भारत संघ, CDSCO, DGFT, CBIC, DRI और DGGI
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली हाईकोर्ट ने किन संस्थाओं को नोटिस जारी किया है?
कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ-साथ CDSCO, DGFT, CBIC, DRI और DGGI जैसी नियामक एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
कैंसर की दवाओं के अवैध निर्यात से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को तय की गई है।