Delhi: जंतर-मंतर पर CCTV निगरानी को लेकर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब
Delhi: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों की निगरानी के लिए लगाए गए CCTV कैमरों और AI तकनीक के इस्तेमाल पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई
Delhi: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों की निगरानी के लिए लगाए गए CCTV कैमरों और AI तकनीक के इस्तेमाल पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 27 जुलाई 2026 को होगी।
यह पूरा मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है जिसे पूर्व JNUSU अध्यक्ष आयशे घोष ने दाखिल किया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि 20 जून 2026 से NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अन्य लोगों की लगातार और बिना किसी नियम के निगरानी की जा रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने वहां फिक्स्ड कैमरे, ऑब्जर्वेशन टावर और AI वाले सर्विलांस वैन तैनात किए हैं, जिनमें चेहरे पहचानने वाली तकनीक (Facial Recognition) का इस्तेमाल हो रहा है।
याचिका में यह बात भी कही गई कि 16 से 20 साल के युवा छात्र और महिलाएं जब खाना खा रहे थे, सो रहे थे या इलाज करा रहे थे, तब भी उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने छात्रों को डराने के लिए उनके फोटो और वीडियो उनके माता-पिता और कॉलेजों को भेजने की धमकी भी दी। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक यह निजता के अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है।
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग करना सरकार का जायज अधिकार है। उन्होंने इसे रूटीन पुलिसिंग बताया और कहा कि यह कोई जासूसी नहीं है। उन्होंने याचिका को ‘लग्जरी लिटिगेशन’ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जगह पर प्राइवेसी की बात करना अजीब है, क्योंकि प्रदर्शनकारी खुद भी वहां वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते हैं।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस के पास विरोध प्रदर्शन वाली जगहों पर निगरानी के लिए कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) है। साथ ही, कोर्ट ने 20-21 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित सख्ती से जुड़े सभी रिकॉर्ड और फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है, जिस पर 11 सितंबर को अलग से सुनवाई होगी।