Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने आतंकी साजिश के मामले में फंसे कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता Khurram Parvez को जमानत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला बुधवार, 10 जून 2026 को सुनाया। इससे पहले दिसंबर 2024 में ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमा
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने आतंकी साजिश के मामले में फंसे कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता Khurram Parvez को जमानत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला बुधवार, 10 जून 2026 को सुनाया। इससे पहले दिसंबर 2024 में ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उन्हें राहत दी है।
Khurram Parvez को जमानत क्यों मिली?
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा की बेंच ने कहा कि परवेज करीब साढ़े चार साल से जेल में हैं। कोर्ट ने माना कि केस की सुनवाई बहुत धीमी गति से चल रही है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उन्हें अपनी निजी स्वतंत्रता का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि NIA का मामला काफी हद तक मुनीर अहमद कटारिया के बयान पर टिका है, जो अब सरकारी गवाह (approver) बन चुके हैं और उनकी गवाही की अभी जांच होनी बाकी है।
क्या है पूरा मामला और NIA के आरोप?
NIA ने नवंबर 2021 में श्रीनगर से खुरराम परवेज को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि वे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba (LeT) के साथ मिलकर साजिश रच रहे थे और भारत में उनके नेटवर्क के लिए लोगों की भर्ती कर रहे थे। NIA ने उन पर आतंकी फंडिंग और साजिश चलाने के आरोप लगाए थे। वहीं, परवेज ने इन सभी आरोपों को गलत बताया और कहा कि वे केवल एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
केस की अब तक की टाइमलाइन
- 22 नवंबर 2021: NIA ने श्रीनगर से खुरराम परवेज को गिरफ्तार किया।
- 25 फरवरी 2022: उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
- 13 मई 2022: NIA ने परवेज और 7 अन्य लोगों के खिलाफ शुरुआती चार्जशीट दाखिल की।
- 17 दिसंबर 2024: ट्रायल कोर्ट ने जमानत देने से मना कर दिया।
- 10 जून 2026: दिल्ली हाई कोर्ट ने शर्तों के साथ जमानत मंजूर की।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Khurram Parvez कौन हैं और उन पर क्या आरोप थे?
Khurram Parvez एक कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। NIA ने उन पर Lashkar-e-Taiba (LeT) के लिए भर्ती करने, आतंकी फंडिंग और साजिश रचने के आरोप लगाए थे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत देने का मुख्य कारण क्या बताया?
कोर्ट ने उनकी साढ़े चार साल की लंबी कैद, ट्रायल की धीमी रफ्तार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को आधार बनाकर जमानत दी है।